जानकारी के मुताबिक शुक्रवार दोपहर कोलारस थाना क्षेत्र के पड़ौरा चौराहा पर पिछोर अनुविभाग के खोड़ चौकी अंतर्गत ग्राम बरेला निवासी बारेलाल (65) पुत्र रामा आदिवासी और ग्राम हिम्मतपुर निवासी पप्पू आदिवासी (60) की सड़क दुर्घटना में मौत हो गई थी। शुक्रवार शाम 7 बजे तक दोनों के शव पोस्टमार्टम के लिए मोर्चरी में रखवा दिए थे। लेकिन आज सुबह पोस्टमार्टम हाउस के स्वीपर नरेश वाल्मीक ने पोस्टमार्टम करने में सहयोग करने से इनकार कर दिया।
नरेश वाल्मीक का कहना था। वह 1997 में भर्ती हुआ था और पिछले 7 सालों से वह पोस्टमार्टम हाउस में पीएम करता हुआ आ रहा है। उसके साथ के कर्मचारियों को पक्का कर दिया गया। लेकिन उसे नहीं किया गया। वहीं 6 साल से पोस्टमार्टम का पैसा उसे नहीं मिला और 6 माह का वेतन भी रोककर रखा हुआ है। इसकी कई शिकायतें वह सिविल सर्जन से लेकर कलेक्टर से कर चुका है। लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई है। इसके चलते उसके परिवार की भूखें मरने की नौबत आ गई है। उसने न्याय की मांग को लेकर यह कदम उठाया है।
सिविल सर्जन ने किया पोस्टमार्टम -
सूचना मिलने के बाद सिविल सर्जन डॉ बी एल यादव पोस्टमार्टम हाउस पहुंच गए थे। जब स्वीपर ने उन्हें सहयोग से इनकार कर दिया तो सिविल सर्जन ही पीएम हाउस में घुस गए और दोनों बॉडी का पोस्टमार्टम किया। सिविल सर्जन डॉ बी एल यादव का कहना था कि उक्त कर्मचारी पार्ट टाइम पर कार्यरत था। सरकारी मद से राशि स्वीकृत ना होने के चलते उसे भुगतान नहीं हो सका है। उसके प्रयास किए जा रहे है। लेकिन ऐसे में सेवाओं को बाधित नहीं किया जा सकता। जिला अस्पताल में 57 स्वीपर है जिनमें से किसी को पोस्टमार्टम हाउस में तैनात किया जायेगा।


