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मोहम्मद जमशेद का कॉलम:एक बदलती हुई दुनिया में मजबूत होती पुरानी दोस्ती Breaking News Update
दुनिया की तस्वीर तेजी से बदल रही है।
अभी महज एक साल पहले तक विश्व-व्यवस्था बहुपक्षीयता, पारस्परिक व्यापार, आर्थिक निर्भरता तथा जलवायु सुधार के सामूहिक प्रयासों पर आधारित थी।
लेकिन लाल सागर संकट, इजराइल-फिलिस्तीन संघर्ष, रूस-यूक्रेन युद्ध और विभिन्न द्विपक्षीय टकरावों व आंतरिक अस्थिरताओं ने दुनिया के देशों को अपने-अपने रास्ते चुनने पर मजबूर कर दिया है।
2025 की सबसे उल्लेखनीय घटना अमेरिका की आक्रामक टैरिफ नीति रही।
इसने ग्लोबल ट्रेड को अस्थिर किया और देशों की अर्थव्यवस्थाओं पर प्रतिकूल प्रभाव डाला।
अमेरिका ने ईयू, क्वाड, ब्रिक्स, एससीओ, जी20 जैसे बहुपक्षीय ढांचों को भी चुनौती देने के प्रयास किए।
इसने देशों को नए गठबंधन बनाने, व्यापार समीकरण बदलने, अपनी अंतरराष्ट्रीय प्रतिबद्धताओं की समीक्षा करने और उन नीतियों को पुनर्जीवित करने की ओर धकेला, जिन्हें वैश्वीकरण के दौर में अप्रासंगिक माना गया था।
अमेरिका ने मध्यस्थता की भूमिका कुछ ज्यादा ही सक्रियता से निभानी शुरू कर दी है।
लेकिन उसका यह दावा कि रूस से भारत को कच्चे तेल का आयात रूस-यूक्रेन युद्ध को प्रभावित कर रहा है, इसलिए भारत पर अधिक टैरिफ थोपे जाने चाहिए, बहुत सूझबूझ भरा नहीं था।
दो सम्प्रभु देशों के आर्थिक संबंध अपने-अपने राष्ट्रीय हितों से संचालित होते हैं।
इनमें भी भारत और रूस का रिश्ता ऐतिहासिक है और कई भू-राजनीतिक उतार-चढ़ावों की परीक्षा में खरा उतरा है।
दिलचस्प तथ्य यह है कि भारत और रूस के बीच राजनयिक संबंध अप्रैल 1947 में ही स्थापित हो गए थे, यानी भारत की स्वतंत्रता से भी पहले।
एक प्रमुख वैश्विक शक्ति के रूप में रूस ने स्वतंत्रता के बाद भारत के आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण सहयोग दिया।
उसने यूएन सुरक्षा परिषद में कई बार भारत के पक्ष में वीटो भी किया।
1965 और 1971 के भारत-पाकिस्तान संघर्षों में रूस ने भारत का साथ दिया, जबकि पाकिस्तान को अमेरिका और चीन का समर्थन प्राप्त था।
रूस ने दोनों देशों के बीच मध्यस्थता भी की और 1966 के ताशकंद समझौते में निर्णायक भूमिका निभाई।
1971 की शांति, मैत्री और सहयोग संधि ने इस संबंध को औपचारिक मजबूती दी।
अक्टूबर 2000 में भारत-रूस रणनीतिक साझेदारी की घोषणा हुई।
2010 में रूसी राष्ट्रपति की भारत यात्रा के दौरान इसे विशेष और विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी का दर्जा दिया गया।
मॉस्को में हुए 22वें शिखर सम्मेलन में भारत-रूस : स्थायी व विस्तृत साझेदारी शीर्षक से संयुक्त वक्तव्य जारी हुआ था।
अब पुतिन 23वीं समिट के लिए दिल्ली पहुंचे हैं।
भारत और रूस ने कई क्षेत्रों में सहयोग के मैकेनिज्म विकसित किए हैं।
इनमें व्यापार और आर्थिक सहयोग प्रमुख है, जिसके तहत 2024-25 में द्विपक्षीय व्यापार 68.7 अरब डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा और 2030 तक इसे 100 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य है।
वहीं रक्षा सहयोग 6 दिसंबर 2021 को हस्ताक्षरित 2021-31 की सैन्य-तकनीकी सहयोग संधि से संचालित होता है।
यह संधि हथियारों और सैन्य उपकरणों के संयुक्त अनुसंधान, विकास, उत्पादन और बिक्री-पश्चात सहायता पर केंद्रित है व इसमें एडवांस्ड सिस्टम्स का सह-उत्पादन भी शामिल है।
यूएन सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता के लिए भारत के प्रयासों के लिए रूस का निरंतर समर्थन उल्लेखनीय है।
दिल्ली शिखर सम्मेलन के परिणामों पर वैश्विक स्तर पर व्यापक रुचि है, जो अंतरराष्ट्रीय मीडिया कवरेज में स्पष्ट दिखाई देती है।
सबसे असामान्य उदाहरण एक अखबार में शिखर बैठक से एक दिन पहले प्रकाशित वह लेख था, जिसे फ्रांस के राजदूत, जर्मनी के उच्चायुक्त और ब्रिटेन के उच्चायुक्त ने संयुक्त रूप से लिखा था।
यूक्रेन को लेकर रूस की नीतियों पर उनकी आलोचनात्मक टिप्पणियों को भारत के विदेश मंत्रालय ने असाधारण बताते हुए कहा था कि किसी तीसरे देश के साथ भारत के संबंधों पर सार्वजनिक सलाह देना स्वीकार्य राजनयिक परंपरा नहीं है।
द न्यूयॉर्क टाइम्स ने टिप्पणी की है कि मोदी को भारत के सबसे बड़े रक्षा आपूर्तिकर्ता रूस और सबसे बड़े व्यापारिक सहयोगी अमेरिका के बीच संतुलन साधते हुए अपने हितों को आगे बढ़ाना होगा।
रॉयटर्स ने लिखा कि दशकों से मॉस्को भारत का शीर्ष रक्षा आपूर्तिकर्ता रहा है और वह 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 100 अरब डॉलर तक ले जाने का इच्छुक है।
बीबीसी के अनुसार, भारत को हथियारों की बिक्री मॉस्को की दीर्घकालिक प्राथमिकता रही है।
साथ ही, श्रम संकट से जूझ रहा रूस भारत को कुशल कार्यबल के संभावित स्रोत के रूप में भी देखता है।
भारत और रूस के राजनयिक संबंध अप्रैल 1947 में ही स्थापित हो गए थे, यानी भारत की स्वतंत्रता से भी पहले।
एक प्रमुख वैश्विक शक्ति के रूप में रूस ने यूएन सुरक्षा परिषद में कई बार भारत के पक्ष में वीटो भी किया है।
(ये लेखक के अपने विचार हैं)।
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Posted on 07 December 2025 | Follow सत्यालेख.com for the latest updates.
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