मानव जीवन दुखों से छूटने का सुअवसर

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 मानव उत्थान सेवा समिति द्वारा आयोजित ग्राम इमलावदी मे आध्यात्मिक सत्संग समारोह के प्रथम दिवस हरिद्वार से पधारे सदगुरुदेव श्री सतपाल जी महाराज के शिष्य महात्मा वर्धमाना नंद जी ने कहा भगवान से अवगत भगवान की जानकारी होना ही भागवत है जो हम कहते हैं उसे हम करने लगे यही ज्ञान है हमारी कथनी और करनी एक हो जाए हमारा जीवन महान बन जाएगा  महात्मा अंजना बाई जी ने  अपने हृदय के उद् गार व्यक्त करते हुए कहा मानव जीवन का परम धर्म समझा है मानव जीवन हमें क्यों मिला है इसका लक्ष्य क्या है और जीवन की सफलता किसमे है सत्संग के द्वारा यह हमें समझ में आता है सत्संग की प्राप्ती बड़े भाग से होती है जब भगवान कृपा करते हैं आत्मज्ञानी  संतों का मिलन होता है कबीरा संगत साधु की साहिब आवे याद जुआरी की संगत से जुआ खेलना सीख जाते हैं शराबी की संगत से शराब पीना सीख जाते हैं ऐसे ही संत भक्ति करना सिखा देते हैं और परमात्मा से मिलन करा देते हैं कार्यक्रम के अंत में हरीषा वाई जी ने कहां की जन्मदुखम जरा दुखम जन्म के आगे मृत्यु खड़ी है सुख के आगे दुख खड़ा है लाभ के आगे हानि खड़ी हुई है इनसे हम कैसे मुक्त हो और कैसे सुखी हो यही विवेक हमे सत्संग से प्राप्त होता है दुखों से छूटने का ज्ञान सदगुरुदेव श्री सतपाल जी महाराज संसार को करा रहे हैं और सभी संतों ने भी अपने सत्संग विचार रखें कार्यक्रम में क्षेत्रीय विधायक महेंद्र सिंह यादव जी पधारे और सभी संतों का स्वागत ग्राम इमलावती वालों ने कल भी सभी क्षेत्रवासियों से आने का आग्रह किया है

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