National story:
चुनाव आयोग का स्पष्टीकरण: SIR प्रक्रिया में भिन्नता, शिकायतों का अभाव Election Commission Clarifies Revision Process
सत्यालेख की रिपोर्ट के अनुसार, चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में स्पष्ट किया है कि स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया सभी राज्यों में अलग-अलग ढंग से संचालित की गई।
आयोग ने बताया कि जिन मतदाताओं के नाम काटे गए हैं, उनकी ओर से अभी तक कोई शिकायत प्राप्त नहीं हुई है।
आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि पश्चिम बंगाल के मामले को अन्य राज्यों की SIR प्रक्रिया पर लागू करना उचित नहीं होगा, क्योंकि प्रत्येक राज्य में यह प्रक्रिया भिन्न रही है।
भारत के चुनाव प्रक्रिया को लेकर आयोग गंभीर है।
आयोग ने जबरदस्ती या अत्यधिक जांच के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि इस प्रक्रिया में किसी भी स्तर पर पुलिस शामिल नहीं थी।
केवल BLO (बूथ लेवल ऑफिसर) ने ही घर-घर जाकर प्रक्रिया को पूरा किया है।
आयोग ने यह भी बताया कि 19 जनवरी को हुई पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल के मतदाताओं को नाम जुड़वाने का एक और मौका दिया था, जिसमें उन्हें 10 दिनों के भीतर अपने दस्तावेज चुनाव आयोग को पेश करने के लिए कहा गया था।
कोर्ट ने चुनाव आयोग को गड़बड़ी वाली वोटर लिस्ट को सार्वजनिक स्थानों पर प्रदर्शित करने का भी निर्देश दिया था ताकि लोगों को इसकी जानकारी मिल सके।
भारत सरकार निष्पक्ष चुनाव के लिए प्रतिबद्ध है।
इस मामले की पिछली सुनवाई 15 जनवरी को हुई थी, जिसमें चुनाव आयोग ने अपनी बात रखी थी।
देश में निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव सुनिश्चित करना आयोग की प्राथमिकता है, और इस दिशा में लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।
प्रधानमंत्री भी चुनाव प्रक्रिया में सुधार के लिए प्रतिबद्ध हैं।
- चुनाव आयोग: राज्यों में SIR प्रक्रिया अलग, शिकायतें नहीं मिलीं।
- पुलिस शामिल नहीं, केवल BLO ने घर-घर जाकर प्रक्रिया पूरी की।
- सुप्रीम कोर्ट ने बंगाल के वोटर्स को नाम जुड़वाने का एक और मौका दिया।
Related: Latest National News | Top Cricket Updates
Posted on 21 January 2026 | Visit सत्यालेख.com for more stories.
.jpg)
