कार्यकर्ताओं का कहना है कि वे शांतिपूर्ण तरीके से दतिया से ग्वालियर तक पैदल मार्च कर रहे थे और उनका उद्देश्य ग्वालियर हाईकोर्ट परिसर में बाबा साहब की प्रतिमा स्थापित कराने की मांग को सरकार और प्रशासन तक पहुंचाना था।
आरोप है कि जैसे ही पैदल यात्रा गोरा घाट क्षेत्र में पहुंची, पुलिस बल ने उन्हें आगे बढ़ने से रोक दिया। इस दौरान प्रशासन की ओर से प्रदर्शनकारियों को कई बार समझाइश दी गई, लेकिन कार्यकर्ता अपनी मांगों पर अड़े रहे। इसके बाद स्थिति तनावपूर्ण हो गई।
भीम आर्मी के कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि पुलिस ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए वाटर कैनन से पानी की तेज बौछार की और आंसू गैस के गोले भी छोड़े। अचानक हुई इस कार्रवाई से मौके पर अफरा-तफरी मच गई और कई कार्यकर्ता गिर पड़े, जिनमें कुछ को हल्की चोटें आने की भी जानकारी सामने आई है।
घटना के बाद पुलिस ने कई कार्यकर्ताओं को हिरासत में ले लिया और क्षेत्र में भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया ताकि स्थिति नियंत्रण में बनी रहे। कुछ समय तक गोरा घाट इलाके में तनावपूर्ण माहौल बना रहा।
भीम आर्मी के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने इस कार्रवाई को “अम्बेडकरवादियों का दमन” बताते हुए कहा कि सरकार उनकी आवाज को दबाने की कोशिश कर रही है। उनका कहना है कि जब-जब सरकार जनता की आवाज से डरती है, तब-तब पुलिस को आगे कर दिया जाता है।
संगठन के कार्यकर्ताओं ने कहा कि भीम आर्मी केवल एक संगठन नहीं बल्कि देश में समानता, सामाजिक न्याय और संविधान के मूल्यों को मजबूत करने का आंदोलन है। उनका कहना है कि बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा ग्वालियर हाईकोर्ट में स्थापित कराने की मांग न्याय और सम्मान से जुड़ी हुई है।
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों को अनदेखा किया गया तो आंदोलन और तेज किया जाएगा। कार्यकर्ताओं का कहना है कि संघर्ष तब तक जारी रहेगा जब तक बाबा साहब की प्रतिमा स्थापित नहीं हो जाती।


