अपनी प्राचीन विद्या की रक्षा करें भारतीय नागरिक-बृजभूषण महाराज

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शिवपुरी-पोहरी रोड़ पर स्थित ग्राम सिरसौद में चल रही भागवत कथा के चतुर्थ दिवस पर पंडित बृजभूषण महाराज ने बताया की भारतीय जो विद्या है एवं भारतीय योग शास्त्र में एवं भारतीय परंपरा में विद्या का वर्णन किया गया है उस विद्या को अब जानने का समय आ गया है अगर यह विद्या लुप्त हो गई तो मनुष्य दूसरे देशों पर ही निर्भर बना रहेगा आज युद्ध की स्थिति बन रही है तो भारत में संसाधनों की कमी देखने को मिल रही है मनुष्य को अब चाहिए कि समय से सीख ले और पुनः अपनी भारतीय परंपरा एवं प्राचीन विद्या की ओर लौटे आचार्य जी ने श्रीमद् भागवत कथा के प्रसंग में सुंदर श्री ध्रुव चरित्र प्रहलाद चरित्र बली चरित्र एवं श्री राम कथा का चरित्र सुनाया और कहा कि भगवान के जो संपूर्ण चरित्र है यह हमको सिखाते हैं कि हमको सदैव ईश्वर की भक्ति में लगे रहना चाहिए एवं कर्म के साथ-साथ धर्म का त्याग भी हमको नहीं करना चाहिए आचार्य जी ने बताया की भगवान के प्रति समर्पण का भाव रखना चाहिए यही  ईश्वर एवं अपने धर्म की सबसे बड़ी सेवा हैं कथा के अंत में महाराज जी ने सुंदर श्री कृष्ण जन्मोत्सव का प्रसंग सुनाया और बताया कि भगवान श्री कृष्ण साक्षात ईश्वर है अपने भक्तों की इच्छा को पूर्ण करने के लिए भगवान अवतार लेकर के इस भूमि पर आते हैं एवं नाना प्रकार के सुख अपने भक्तों को देकर के अपने धाम के लिए चले जाते हैं भगवान का अवतार धर्म की रक्षा के लिए होता है भगवान धर्म की पुनर्स्थापना करके अपने धाम के लिए जाते हैं और समय पड़ने पर पुनः भगवान आकर के धर्म की रक्षा करते हैं इस कथा का आयोजन 16 मार्च तक किया जा रहा है कथा का समय 2:00 बजे शाम 6:00 बजे तक रखा गया कथा के यजमान विष्णु धाकड़ जी हैं

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