कार्यक्रम की शुरुआत बाबासाहेब अंबेडकर की प्रतिमा पर माल्यार्पण एवं बुद्ध वंदना के साथ हुई। उपस्थित अतिथियों एवं समाजजनों ने बाबा साहेब के विचारों को आत्मसात करते हुए शिक्षा, समानता और सामाजिक न्याय के मार्ग पर चलने का संकल्प लिया। पूरे आयोजन में अंबेडकरवादी विचारधारा और सामाजिक समरसता का संदेश स्पष्ट रूप से झलकता रहा।
सम्मेलन में बौद्धाचार्य भिक्षु सदानंद भंते जी की विशेष उपस्थिति रही, जिन्होंने नवदंपतियों को आशीर्वचन देते हुए वैवाहिक जीवन में नैतिकता, समर्पण और पारिवारिक मूल्यों को अपनाने की सीख दी। मुख्य अतिथि के रूप में प्राण सिंह बौद्ध जी एवं विशिष्ट अतिथि के रूप में विजय गोयल जी तथा श्रीमती सविता गोयल जी उपस्थित रहे। सभी अतिथियों ने नवविवाहित जोड़ों को शुभकामनाएं देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की तथा 6 दीवार घड़ियां उपहार स्वरूप भेंट कर उन्हें प्रोत्साहित किया।
इस आयोजन के संस्थापक एवं संयोजक भानुप्रकाश बौद्ध (कोलारस) का विशेष योगदान रहा। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि सामूहिक विवाह सम्मेलन समाज में फिजूलखर्ची को रोकने, आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को सहयोग देने और सामाजिक एकता को सुदृढ़ करने का एक सशक्त माध्यम है। उन्होंने बताया कि यह आयोजन पिछले कई वर्षों से निरंतर आयोजित किया जा रहा है, जो हर वर्ष और अधिक भव्य एवं सफल होता जा रहा है। उनके नेतृत्व में समाज सेवा, शिक्षा प्रसार और सामाजिक जागरूकता के क्षेत्र में निरंतर कार्य किए जा रहे हैं, जिससे समाज में सकारात्मक परिवर्तन देखने को मिल रहा है।
कार्यक्रम में करन इकलोदिया (जनपद सदस्य), चन्द्रशेखर जाटव (सरपंच), वीरेंद्र जाटव, रमेश जी, रामा नेताजी, पवन जादौन, बंटी मोहनिया, प्रवीण कुमार, दयाली सरपंच, गुलाब सिंह नेताजी, वीरेंद्र टेलर, नरेंद्र चौधरी, सेवाराम, धर्मवीर, संतोष मौर्य, प्रकाश जादौन, संतोष जी, गोपाल कोली, पवन कोली, राकेश पेंटर, रामकृष्ण, केदार, मोहन, पप्पू, रामहेत, देवेन्द्र, दिनेश पत्रकार, रवि, महेश, विनोद आदिवासी, राहुल, अनिल, हरिशंकर, दौलत सिंह सहित समस्त जाटव समाज के सैकड़ों लोग बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
समारोह के अंत में सभी अतिथियों एवं समाजजनों ने इस आयोजन को सफल बनाने में योगदान देने वाले सभी सहयोगियों का आभार व्यक्त किया। यह सामूहिक विवाह सम्मेलन न केवल नवदंपतियों के जीवन की नई शुरुआत का साक्षी बना, बल्कि समाज में एकता, सहयोग और सामाजिक उत्थान का सशक्त संदेश भी दे गया।


