पीड़ित परिवारों में निरपत सिंह पुत्र चतरा केवट, रामप्रसाद पुत्र पूरन, राजाराम पुत्र खचेरा और पुरुषोत्तम पुत्र निरपत चंद्रशेखर सेन पुत्र कमरलाल सेन, कई अन्य शामिल हैं, जिनके पास वर्तमान में रहने के लिए कोई स्थायी स्थान नहीं है। मजबूरी में ये लोग गांव के आसपास दूसरी जगह अस्थायी रूप से निवास कर रहे हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने आवास हेतु ऑनलाइन रसीद भी कटवाई है और समय-समय पर जिला प्रशासन व जनप्रतिनिधियों को आवेदन सौंपे हैं। इनमें पूर्व सांसद केपी यादव, पूर्व कैबिनेट मंत्री महेंद्र सिंह सिसोदिया, जिला कलेक्टर शिवपुरी, तहसीलदार कोलारस व बदरवास, वन विभाग के अधिकारियों सहित कई जिम्मेदार पदाधिकारी शामिल हैं। इसके बावजूद उनकी समस्या जस की तस बनी हुई है।प्रशासन द्वारा कागजात मांगे जाने पर ग्रामीणों का कहना है कि उनके सभी दस्तावेज झोपड़ियों के साथ जल गए, जिससे वे आवश्यक प्रमाण प्रस्तुत करने में असमर्थ हैं।
ग्रामीणों का तर्क है कि जब उनके पास रहने के लिए कोई वैकल्पिक भूमि नहीं है, तो उन्हें शासकीय या वन विभाग की भूमि पर आवास हेतु पट्टा दिया जाना न्यायसंगत है। लगातार बढ़ते आवास संकट और खराब होती आर्थिक स्थिति के चलते ये परिवार बेहद कठिन परिस्थितियों में जीवन यापन कर रहे हैं।
अब इन आवासहीन परिवारों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि उनकी स्थिति को गंभीरता से देखते हुए जल्द से जल्द उन्हें रहने के लिए जमीन का पट्टा उपलब्ध कराया जाए, ताकि वे एक सुरक्षित और स्थायी जीवन जी सकें।


