आदि गुरु शंकराचार्य का चिंतन देता है आध्यात्मिकता की प्रेरणा – डॉ गिरीश दुबे आदि गुरु शंकराचार्य जयंती पर जिला स्तरीय व्याख्यानमाला आयोजित

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 म.प्र. जन अभियान परिषद जिला शिवपुरी द्वारा आदि गुरु शंकराचार्य जयंती के अवसर पर जिला स्तरीय व्याख्यानमाला का आयोजन शासकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान, शिवपुरी के सभागार में किया गया। जिसमें मुख्य अतिथि डॉ गिरीश दुबे जी महाराज मुख्य सेवक श्री बाँकड़े सरकार हनुमान मंदिर, मुख्य वक्ता डॉ तरुण शर्मा जी पूर्व संचालक एवं वर्तमान वित्त सलाहकार कोटिल्य एकेडमी, कार्यक्रम में विशिष्ठ अथिति परम पूज्य संत श्री हरि हर्षानंद जी महाराज ऋषिकेश हरिद्वार, श्री सुशील बरुआ जी संभाग समन्वयक म.प्र. जन अभियान परिषद संभाग ग्वालियर, कार्यक्रम संयोजक डॉ रीना शर्मा जिला समन्वयक म.प्र. जन अभियान परिषद जिला शिवपुरी विशेष रूप से उपस्थित रहे। 

   कार्यक्रम का प्रारंभ आदि गुरु शंकराचार्य जी के चित्र पर माल्यार्पण और दीप प्रज्वलित कर किया गया। कार्यक्रम की प्रस्तावना जिला समन्वयक डॉ रीना शर्मा जी द्वारा प्रस्तुत की गई। कार्यक्रम में मुख्य अथिति के रूप में बोलते हुए डॉ गिरीश दुबे जी महाराज द्वारा बताया गया कि हमारे देश का यह अद्भुत सौभाग्य है कि इस देश को भगवान राम, कृष्ण, आचार्य चाणक्य और शंकराचार्य जी जैसे महापुरुषों ने गढ़ा है। हमारे यहाँ 'भगवान राम' ने उत्तर-दक्षिण को जोड़ा तो वहीं भगवान कृष्ण' ने पूरब-पश्चिम को जोड़ा। वहीं आदि गुरु शंकराचार्य जी' ने भारत की सांस्कृतिक एकता को 'चार मठों' के माध्यम से जोड़कर भारत की संस्कृति और आध्यात्मिक परम्परा को स्थायी रूप से स्थापित करने का महत्वपूर्ण काम किया है।  

मुख्य वक्ता डॉ तरुण शर्मा जी ने इस अवसर पर अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि आज आधुनिक भारत की जो सीमा-रेखा बनी है वो 'आदि शंकराचार्य जी' के पथ-संचलन से बनी है. जहाँ उनके पैर पड़े वो स्थान भारत में रह गया और जहाँ उनके पैर नहीं पड़ पाए वो हिस्सा दुर्भाग्य से भारत से कट गया आज से 1200 वर्ष पहले बिना किसी साधन, बिना किसी सुविधा के 'केरल' से चलकर पैदल ही पूरे देश की यात्रा आदि शंकराचार्य जी ने पूरी की. देश में 'धर्म' के सही 'मर्म' का प्रचार और ज्ञान के केन्द्रों की स्थापना उन्होंने की. इस पूरे पथ-संचलन और ज्ञान-केन्द्रों की स्थापना के अभियान में उन्होंने कितने कष्ट सहे होंगे, कितनी मुश्किलों से होकर उन्हें गुजरना पड़ा होगा तब कहीं जाकर उनका यह संकल्प पूरा हुआ।  

   परम पूज्य संत श्री हरि हर्षानंद जी महाराज ने इस अवसर पर अपने आशीर्वचन देते हुए बताया कि आदि शंकराचार्य के जीवन और कार्यों का भारतीय संस्कृति और हिन्दू धर्म पर गहरा प्रभाव पड़ा है। उनके दर्शन और शिक्षाएँ आज भी प्रासंगिक है और लोगों को आध्यात्मिक जीवन की ओर प्रेरित करती है। 

सुशील बरुआ जी संभाग समन्वयक द्वारा आदि शंकराचार्य जी के जीवन पर प्रकाश डालते हुए हम सभी को उनके विचारों से प्रेरणा लेते हुए कार्य करने को प्रेरित किया। उन्होंने बताया कि 'आदि शंकराचार्य जी' के अभियान और उनके योगदान ने उस दौर में अवनत होते भारत को फिर से उठने, एकजुट होने, कठिन दौर में भी ज़िंदा रहने और जुड़े रहने की ताक़त दी.

        कार्यक्रम का संचालन महेश परिहार विकासखण्ड समन्वयक नरवर  एवं आभार प्रदर्शन शिशुपाल सिंह जादौन विकासखण्ड समन्वयक शिवपुरी द्वारा किया गया। कार्यक्रम में जन अभियान परिषद के समस्त विकासखण्ड समन्वयक, अधिकारी, कर्मचारी, नवांकुर संस्था एवं प्रस्फुटन समितियों के पदाधिकारी, मुख्यमंत्री सामुदायिक नेतृत्व क्षमता विकास पाठ्यक्रम के परामर्शदाता एवं छात्र- छात्रा उपस्थित रहे।

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