कार्यक्रम में गौ सेवक कल्लू महाराज ने विशेष रूप से उपस्थित होकर मंगल पांडेय को श्रद्धासुमन अर्पित किए और कहा कि “देश के प्रति समर्पण ही सच्चा धर्म है। जब हम अपने देश की रक्षा करते हैं, तो धर्म की रक्षा अपने आप हो जाती है।” उन्होंने यह भी बताया कि आज़ादी की जो पहली चिंगारी जली, वह मंगल पांडेय के साहस और बलिदान से ही संभव हुई, जो आज भी हर भारतीय के दिल में जीवित है।
इस मौके पर संजू ठाकुर, आशीष गुप्ता, दीपक तिवारी, जितेंद्र लोधी, राजू लोधी एवं जयराम लोधी सहित कई समाजसेवी उपस्थित रहे। सभी ने एक स्वर में कहा कि भारत की स्वतंत्रता किसी एक व्यक्ति के प्रयास का परिणाम नहीं, बल्कि अनेक क्रांतिकारी वीरों के त्याग और बलिदान का फल है। , , , , , और जैसे महान क्रांतिकारियों के कारण ही आज हम स्वतंत्र और सुरक्षित जीवन जी रहे हैं।
गौ सेवक कल्लू महाराज ने अपने संदेश में यह भी कहा कि “हर संघर्ष केवल हथियारों से नहीं, बल्कि बुद्धि और विवेक से भी जीता जाता है।” उन्होंने समाज को एकजुट रहने और हर परिस्थिति में साथ मिलकर आगे बढ़ने का संदेश दिया।
उल्लेखनीय है कि 8 अप्रैल 1857 को अंग्रेजों द्वारा मंगल पांडेय को फांसी दी गई थी, लेकिन उनका बलिदान व्यर्थ नहीं गया। उनके साहस ने पूरे देश में स्वतंत्रता की अलख जगाई और यही चिंगारी आगे चलकर आज़ादी की मशाल बनी।
कार्यक्रम के अंत में उपस्थित सभी लोगों ने अमर शहीद मंगल पांडेय को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके बताए मार्ग पर चलने का संकल्प लिया। सभी ने कहा कि भारत की यह पावन धरती वीरों के रक्त से सींची गई है और हमें उनके बलिदान को कभी नहीं भूलना चाहिए।


