शिवपुरी जिला चिकित्सालय एक बार फिर अखाड़े में तब्दील हो गया, जहाँ शुक्रवार को एक ऐसी घटना घटी जिसने अस्पताल की सुरक्षा और संवेदनशीलता दोनों को कटघरे में खड़ा कर दिया है। अमूमन ऐसी घटनाओं में एक ही पक्ष की कहानी सामने आती है, लेकिन इस मामले में दो ऐसी तस्वीरें उभरकर सामने आई हैं जो एक-दूसरे के बिल्कुल उलट हैं। एक तरफ जहाँ अपनी तड़पती गर्भवती पत्नी के इलाज के लिए बेबस पति सिस्टम पर प्रताड़ना का आरोप लगा रहा है, वहीं दूसरी तरफ ऑन-ड्यूटी महिला सुरक्षाकर्मी ने उसी पति पर छेड़छाड़, मारपीट और दबंगई का बेहद गंभीर आरोप मढ़ दिया है।
इस पूरे ड्रामे की शुरुआत पिछोर तहसील के ग्राम क्यारा से होती है, जहाँ के रहने वाले जिनेंद्र कुमार जाटव ने अपनी 5 महीने की गर्भवती पत्नी पिंकी जाटव को पेट में गंभीर दर्द होने के बाद यहाँ भर्ती कराया था। जिनेंद्र की कहानी एक लाचार अटेंडर की दास्तां बयां करती है। उसका आरोप है कि पिछोर से रेफर होकर आने के बाद भी उसकी पत्नी को एक प्रतिशत आराम नहीं मिला और वह दर्द से तड़पती रही। जिनेंद्र का कहना है कि जब उसने डॉक्टरों से सोनोग्राफी लिखने या किसी बड़े अस्पताल में रेफर करने की मिन्नतें कीं, तो न डॉक्टर मिले और न ही नर्सों ने उसकी बात सुनी। व्यवस्था से तंग आकर जब उसने इस लापरवाही का वीडियो बनाना चाहा, तो वहां तैनात महिला गार्ड्स ने न सिर्फ उसका मोबाइल छीनकर वीडियो डिलीट कर दिया, बल्कि उसे और उसकी बूढ़ी मां रामवती को घसीटते हुए मुख्य गेट से बाहर सड़क पर फेंक दिया। रोती हुई मां का कहना था कि उनका बेटा अनपढ़ है, अगर कोई गलती थी तो माफ़ किया जा सकता था, लेकिन उन्हें जानवरों की तरह खदेड़ दिया गया।
लेकिन, इस पूरी कहानी का दूसरा पहलू इससे बिल्कुल जुदा और चौंकाने वाला है, जो अस्पताल की सुरक्षाकर्मी शहरबानो की तरफ से सामने आया है। महिला गार्ड के मुताबिक, मामला संवेदनशीलता का नहीं बल्कि नियमों की धज्जियां उड़ाने और शासकीय कार्य में बाधा डालने का है। सुरक्षाकर्मी का कहना है कि शुक्रवार को जब पिंकी जाटव महिला वार्ड में भर्ती थी, तब नियमों के अनुसार उसके पास पहले से दो महिलाएं मौजूद थीं और उस वक्त विजिटिंग आवर्स भी नहीं थे। जब शहरबानो ने पूरी मुस्तैदी से अपनी ड्यूटी निभाते हुए जिनेंद्र और उसके परिजनों को वार्ड के अंदर घुसने से रोका, तो मरीज का पति अपना आपा खो बैठा।
महिला सुरक्षाकर्मी का आरोप है कि रोकने पर जिनेंद्र न सिर्फ गाली-गलौज करने लगा, बल्कि उसने मर्यादा की सारी हदें पार करते हुए उसका हाथ मरोड़ दिया और बुरी नीयत से उस पर हमला कर दिया। जब इस जांबाज महिला गार्ड ने साहस दिखाते हुए आरोपी पति को पकड़कर थाने ले जाने की कोशिश की, तो अस्पताल परिसर में मौजूद उसके अन्य परिजनों ने हंगामा खड़ा कर दिया और आरोपी को छुड़ाने के लिए धक्का-मुक्की शुरू कर दी।
इस पूरे हंगामे के बाद पीड़ित महिला गार्ड शहरबानो ने दोपहर 12 बजे सीधे शिवपुरी कोतवाली पुलिस को आवेदन देकर शासकीय कार्य में बाधा डालने, मारपीट और अभद्रता करने वाले आरोपियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की है। साथ ही अस्पताल प्रबंधन से सीसीटीवी फुटेज खंगालकर निष्पक्ष जांच की गुहार लगाई है। इधर, अस्पताल के बाहर जुटी भारी भीड़ के बीच पीड़ित परिवार का कहना है कि वे किसी पर कार्रवाई नहीं चाहते, बस उनकी पत्नी और अजन्मे बच्चे का सही इलाज हो जाए या उन्हें रेफर कर दिया जाए। अब गेंद कोतवाली पुलिस के पाले में है, जो सीसीटीवी फुटेज के जरिए इस बात की सच्चाई तलाश रही है कि अस्पताल के इस गलियारे में असल में कौन पीड़ित था और कौन गुनहगार।


