ग्रामीणों के अनुसार, वार्ड क्रमांक 4, 6, 11, 13 और 14 में पिछले चार-पांच सालों से नल-जल योजना के नाम पर केवल खानापूर्ति की जा रही है। कंपनी ने कागजों पर काम 'पूर्ण' दर्शाकर भुगतान तो ले लिया, लेकिन धरातल पर न तो पाइपलाइन सही से बिछाई गई और न ही घरों तक पानी पहुंचा।
पीड़ित ग्रामीणों का आरोप है कि जब वे अपनी समस्या लेकर साइट इंजीनियर अभय और सुपरवाइजर केशव केवट के पास पहुंचे, तो उन्हें सहायता के बजाय दुर्व्यवहार का सामना करना पड़ा। ग्रामीणों का आरोप है कि कंपनी के इन कर्मचारियों ने न केवल उनके साथ अभद्र भाषा का प्रयोग किया, बल्कि जान से मारने की धमकी भी दी। उन्होंने खुलेआम कहा, "हम बड़े अधिकारियों को लाखों रुपये देते हैं, हमारा कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता।"
योजना की विफलता का आलम यह है कि जो पाइपलाइन बिछाई गई, वह जगह-जगह से क्षतिग्रस्त हो चुकी है। इससे पानी की सप्लाई तो नहीं हो रही, लेकिन सड़कों पर रिसाव से चारों तरफ कीचड़ और गंदगी का अंबार लग गया है। ग्रामीण अब जलसंकट के साथ-साथ जलभराव के कारण फैलने वाली बीमारियों के साये में जीने को मजबूर हैं।
ग्रामीणों ने बताया कि उन्होंने सीएम हेल्पलाइन पर भी शिकायत दर्ज कराई थी, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। सिस्टम की इस चुप्पी से परेशान होकर मंगलवार की दोपहर 2 बजे ग्रामीणों ने कलेक्टर को लिखित आवेदन सौंपकर न्याय की गुहार लगाई है।


