जानकारी के अनुसार सुरेश रावत ने बताया कि उनकी मां मानोबाई के नाम ग्राम छिरारी में कृषि भूमि है, जिस पर कथित कब्जे को हटाने के लिए तहसीलदार न्यायालय द्वारा 8 जून 2026 को कार्रवाई का आदेश दिया गया था। उनका आरोप है कि इसी कार्रवाई से नाराज होकर विरोधी पक्ष ने रंजिशवश 23 जुलाई 2026 को करैरा थाने में मारपीट का मामला दर्ज कराया, जिसमें उनका नाम भी शामिल कर दिया गया।
सुरेश रावत ने दावा किया है कि घटना के समय वह शासकीय प्राथमिक विद्यालय बरोदा में शिक्षक के रूप में ड्यूटी पर मौजूद थे। इसके समर्थन में उन्होंने ऑनलाइन उपस्थिति रिकॉर्ड और गांव के पंचनामा को साक्ष्य बताया है। वहीं, अन्य दो आवेदक रूप सिंह रावत और मुलुआ रावत का कहना है कि घटना के समय वे करैरा स्थित सोनालिका ट्रैक्टर एजेंसी पर ट्रैक्टर संबंधी कार्य से मौजूद थे, जिसका सीसीटीवी फुटेज भी उनके पास उपलब्ध है।
तीनों आवेदकों ने पुलिस अधीक्षक से मांग की है कि अपराध क्रमांक 489/2026 की जांच किसी वरिष्ठ अधिकारी से कराई जाए, उपलब्ध साक्ष्यों की जांच कर उन्हें प्रकरण से अलग किया जाए तथा जांच पूरी होने तक पुलिस उन्हें अनावश्यक रूप से परेशान न करे।


