नरवर। ऐतिहासिक और पुरातात्विक महत्व रखने वाले नरवर किले से चोरी हुई करीब 400 साल पुरानी तोप के मामले में पुलिस की जांच अब तक किसी ठोस नतीजे तक नहीं पहुंच सकी है। घटना के बाद पुलिस ने राजस्थान से दो संदिग्ध आरोपियों को गिरफ्तार किया था। चोरी की गई तोप को ले जाने में जिस बोलेरो वाहन का इस्तेमाल किया गया था, पुलिस ने उससे जुड़े दो लोगों को हिरासत में लेकर कार्रवाई भी की थी। लेकिन इसके बाद मामले में आगे क्या हुआ, चोरी की गई तोप कहां है और इस पूरे गिरोह में कौन-कौन लोग शामिल थे, इन सवालों के जवाब आज भी सामने नहीं आ सके हैं।
गिरफ्तारी के बाद भी मामले में रहस्य बरकरार
नरवर किले से ऐतिहासिक तोप चोरी होने की घटना सामने आने के बाद पुलिस विभाग में हड़कंप मच गया था। मामला ऐतिहासिक धरोहर से जुड़ा होने के कारण इसकी गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने जांच शुरू की और राजस्थान तक पहुंचकर दो लोगों को गिरफ्तार किया। बताया गया कि चोरी की गई तोप को ले जाने के लिए बोलेरो वाहन का इस्तेमाल किया गया था और पुलिस ने उसी वाहन से जुड़े दो लोगों को गिरफ्तार किया था।
लेकिन गिरफ्तारी के बाद पुलिस की जांच किस दिशा में आगे बढ़ी, चोरी की गई तोप बरामद हुई या नहीं, इसके पीछे मुख्य आरोपी कौन हैं और तोप चोरी करवाने के पीछे आखिर किसका हाथ था—इन सवालों पर पुलिस की ओर से अब तक कोई स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है।
400 साल पुरानी धरोहर आखिर कहां गई?
सबसे बड़ा सवाल यह है कि नरवर किले से चोरी की गई ऐतिहासिक तोप आखिर कहां है? क्या पुलिस ने इसे बरामद कर लिया है या अभी भी तोप की तलाश जारी है? यदि तोप बरामद नहीं हुई है तो पुलिस की जांच अब तक किस स्तर तक पहुंची है? वहीं यदि पुलिस ने तोप बरामद कर ली है तो इसकी आधिकारिक जानकारी सार्वजनिक क्यों नहीं की गई?
ऐतिहासिक धरोहर की सुरक्षा से जुड़ा यह मामला लंबे समय से लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। स्थानीय लोगों का कहना है कि किले की सुरक्षा व्यवस्था और ऐतिहासिक वस्तुओं की निगरानी को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े होते हैं।
पुलिस विभाग की चुप्पी से बढ़ रहे सवाल
मामले में दो लोगों की गिरफ्तारी के बाद पुलिस विभाग की ओर से आगे की कार्रवाई को लेकर स्पष्ट जानकारी नहीं दिए जाने से कई सवाल खड़े हो रहे हैं। आखिर पुलिस ने जिन दो लोगों को गिरफ्तार किया, उनसे पूछताछ में क्या सामने आया? क्या चोरी की तोप को ठिकाने लगाने वाले लोगों की पहचान हुई? क्या इस मामले में कोई बड़ा गिरोह सक्रिय है? क्या चोरी की गई तोप को किसी अन्य स्थान पर ले जाया गया?
इन तमाम सवालों का जवाब अभी भी सामने नहीं आया है।
एसपी के इनाम की घोषणा के बाद भी जांच का इंतजार
गौरतलब है कि ऐतिहासिक तोप चोरी के मामले में जिला पुलिस अधीक्षक द्वारा तोप की जानकारी देने वाले व्यक्ति के लिए 10 हजार रुपए के इनाम की घोषणा भी की गई थी। इसके बाद पुलिस की सक्रियता को लेकर उम्मीद जगी थी कि जल्द ही मामले का पूरा खुलासा कर ऐतिहासिक तोप बरामद कर ली जाएगी। लेकिन समय बीतने के बावजूद मामले की अंतिम स्थिति स्पष्ट नहीं होने से अब पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं।
जनता जानना चाहती है—कहां पहुंची जांच?
नरवर की ऐतिहासिक धरोहर केवल स्थानीय लोगों की पहचान नहीं, बल्कि क्षेत्र के इतिहास से जुड़ी महत्वपूर्ण विरासत है। ऐसे में 400 साल पुरानी तोप का चोरी होना और लंबे समय तक उसका पता नहीं चल पाना गंभीर विषय है।
अब लोगों की मांग है कि पुलिस इस पूरे मामले की जांच की वर्तमान स्थिति सार्वजनिक करे। गिरफ्तार किए गए आरोपियों से पूछताछ में क्या खुलासा हुआ, बोलेरो वाहन की भूमिका क्या थी, तोप चोरी के पीछे कौन लोग थे और ऐतिहासिक तोप की बरामदगी हुई या नहीं—इन सभी सवालों का जवाब पुलिस विभाग को देना चाहिए।
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि राजस्थान से दो लोगों की गिरफ्तारी के बाद भी नरवर की ऐतिहासिक तोप चोरी का पूरा सच सामने क्यों नहीं आया? आखिर जांच कहां अटक गई और 400 साल पुरानी धरोहर आज कहां है?


