सीहोर पंचायत का चरखाई गांव, करीब 20 परिवारों की आबादी
चरखाई गांव सीहोर पंचायत के अंतर्गत आता है और सीहोर गांव से करीब तीन किलोमीटर दूर स्थित है। गांव तक पहुंचने के लिए पुराना कच्चा रास्ता है। रास्ते में एक बरसाती नाला पड़ता है, जिस पर पुलिया नहीं होने के कारण बारिश के दिनों में आवागमन पूरी तरह बाधित हो जाता है। खेतों में धान की फसल और करीब दो फीट तक भरा पानी ग्रामीणों की मुश्किलें और बढ़ा देता है।
ग्रामीणों के मुताबिक, मानसून के दौरान यदि कोई व्यक्ति बीमार पड़ जाए तो उसे अस्पताल या सड़क तक पहुंचाना किसी चुनौती से कम नहीं होता। मरीज को चारपाई पर लिटाकर करीब तीन किलोमीटर तक पानी और कीचड़ से भरे खेतों के बीच से पैदल ले जाना पड़ता है।
रिटायर्ड फौजी ने प्रशासन से पूछा—क्या हमारा गांव आजाद है?
सीहोर निवासी रिटायर्ड फौजी रामनिवास फौजी लंबे समय से चरखाई गांव की समस्याओं को लेकर प्रशासन का ध्यान आकर्षित कर रहे हैं। 14 अगस्त को उन्होंने करैरा एसडीएम को आवेदन सौंपकर गांव की बदहाल स्थिति सामने रखी। आवेदन में समस्याओं का उल्लेख करते हुए ग्रामीणों ने मूल सवाल उठाया कि आखिर आजादी के 80 साल बाद भी उन्हें सड़क, बिजली, पानी और शिक्षा जैसी बुनियादी सुविधाएं क्यों नहीं मिल पा रही हैं।
बच्चों की शिक्षा भी बारिश के भरोसे
गांव में स्कूल नहीं होने के कारण बच्चों को दूसरे गांव में पढ़ने जाना पड़ता है। बरसात के दिनों में रास्ते में आने वाला नाला बच्चों के लिए सबसे बड़ी बाधा बन जाता है। ग्रामीणों का कहना है कि मासूम बच्चों को कई बार पानी के बीच से रास्ता पार करना पड़ता है। पुलिया या पक्के रास्ते के अभाव में उनकी शिक्षा भी मौसम पर निर्भर हो जाती है।
बिजली नहीं, विकास की रोशनी भी दूर
ग्रामीणों के अनुसार चरखाई में बिजली की सुविधा भी नहीं पहुंची है। बिजली नहीं होने के कारण घरों में सामान्य विद्युत उपकरण तक उपयोग नहीं किए जा सकते। ग्रामीणों का कहना है कि जब आसपास के गांव आधुनिक सुविधाओं से जुड़ रहे हैं, तब चरखाई के लोग आज भी मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
एक हैंडपंप तक नहीं लग सका
गांव की पेयजल समस्या भी गंभीर है। ग्रामीणों के अनुसार यहां सरकारी हैंडपंप तक नहीं है। आसपास के खेतों में लगे ट्यूबवेल से पानी मिलता है, लेकिन यह बिजली की उपलब्धता पर निर्भर करता है। रात में बिजली आने पर ग्रामीणों को करीब एक किलोमीटर दूर स्थित कुएं से पानी लाना पड़ता है। बरसात में कुएं का पानी भी दूषित होने की आशंका रहती है, जिससे ग्रामीणों के सामने स्वच्छ पेयजल का संकट खड़ा हो जाता है।
मौत के बाद भी नहीं मिलता अंतिम संस्कार का स्थान
चरखाई की सबसे गंभीर समस्याओं में श्मशान घाट का अभाव भी शामिल है। ग्रामीणों का कहना है कि बारिश के दिनों में किसी व्यक्ति की मृत्यु होने पर अंतिम संस्कार करना भी मुश्किल हो जाता है। परिवार को मौसम साफ होने का इंतजार करना पड़ता है या फिर खुले स्थान पर अंतिम संस्कार की मजबूरी झेलनी पड़ती है।
सड़क नहीं तो वाहन रखना भी मुश्किल
कच्चे और बरसात में बंद हो जाने वाले रास्ते के कारण ग्रामीण अपने निजी वाहन तक आसानी से गांव नहीं ले जा सकते। ग्रामीणों का कहना है कि सड़क जैसी मूलभूत सुविधा नहीं होने से गांव आर्थिक और सामाजिक विकास की मुख्यधारा से अलग-थलग पड़ गया है।
ग्रामीणों का सवाल—हम भी वोट देते हैं, फिर सुविधाएं क्यों नहीं?
एसडीएम को दिए गए आवेदन में ग्रामीणों ने लोकतंत्र को लेकर बेहद गंभीर सवाल उठाया है। उनका कहना है कि वे भी देश के नागरिक हैं, मतदान करते हैं और सरकार चुनने में अपनी भूमिका निभाते हैं। ऐसे में उनका भी अधिकार है कि उन्हें सड़क, बिजली, पानी, शिक्षा और श्मशान जैसी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं।
अब ग्रामीणों की निगाह प्रशासन पर है। सवाल यह है कि क्या आजादी के 80 साल बाद चरखाई गांव को भी विकास की मुख्यधारा से जोड़ा जाएगा, या हर बरसात में यह गांव इसी तरह सड़क, बिजली, पानी और स्वास्थ्य सुविधाओं से कटता रहेगा?


