कोलारस! कोलारस नगर इन दिनों झूला उत्सव की भक्ति और उल्लास में सराबोर है। नगर के प्राचीन मंदिरों में भगवान के झूला उत्सव का आयोजन श्रद्धा और हर्षोल्लास के साथ किया जा रहा है। शाम 7 बजे से मंदिरों में झूला उत्सव के साथ पद गायन, भजन-कीर्तन और धार्मिक कार्यक्रम शुरू हो जाते हैं, जो देर रात तक चलते हैं।प्राचीन श्री गोपालजी मंदिर, पंचायती पंसरी मंदिर सहित बड़े राम-जानकी मंदिर, श्री लक्ष्मीनारायण मंदिर, पाराशर जी का राधा-गोपालजी मंदिर, बांके बिहारी मंदिर, गदुला जी का मंदिर, सत्यनारायणजी मंदिर, प्राचीन धर्मशाला वाले हनुमानजी मंदिर और कल्याणजी मंदिर सहित नगर के अनेक मंदिरों में ग्यारस से झूले सजाए गए हैं। वहीं श्री गोपालजी मंदिर में तीज से ही झूला उत्सव की शुरुआत हो जाती है।झूला उत्सव के लिए मंदिरों को आकर्षक ढंग से सजाया गया है। रंग-बिरंगी रोशनी से सजे मंदिर रात में विशेष आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। शाम होते ही श्रद्धालुओं की भीड़ भगवान के झूला दर्शन के लिए मंदिरों में पहुंच रही है। भक्त देर रात तक झूले में विराजमान भगवान के दर्शन कर पुण्य लाभ अर्जित कर रहे हैं।मंदिरों में प्रतिदिन रात्रि भजन-कीर्तन और पद गायन के आयोजन हो रहे हैं, जिसमें श्रद्धालु उत्साहपूर्वक भाग ले रहे हैं। भक्ति संगीत और धार्मिक वातावरण से पूरा नगर भक्तिमय नजर आ रहा है।झूला उत्सव ने कोलारस की धार्मिक और सांस्कृतिक छटा को और भी निखार दिया है। मंदिरों की सजावट, भजनों की गूंज और श्रद्धालुओं की आस्था के बीच कोलारस इन दिनों मानो वृंदावन का स्वरूप धारण करता नजर आ रहा है


