शिवपुरी। नगरपालिका शिवपुरी के सफाई कर्मचारियों की बीते 25 अगस्त से जारी कामबंद हड़ताल का असर अब पूरे शहर में साफ दिखाई देने लगा है। बाजारों से लेकर कॉलोनियों और प्रमुख मार्गों तक जगह-जगह कचरे के ढेर जमा हो गए हैं। शहर की सफाई व्यवस्था पूरी तरह प्रभावित होने के बीच नगरपालिका प्रशासन द्वारा हड़ताली सफाईकर्मियों को बीती आधी रात नोटिस जारी किए जाने के बाद मामला और गरमा गया है।
शनिवार को हड़ताल पर बैठे सफाई कर्मचारियों ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर नगरपालिका प्रशासन के रवैये पर नाराजगी जताई और दो टूक शब्दों में कहा कि यदि दबाव बनाकर कर्मचारियों को डराने का प्रयास किया गया तो उन्होंने स्वयं को नौकरी से हटा हुआ मान लिया है। सफाईकर्मियों ने कहा कि अब शहर की सफाई की जिम्मेदारी नपाध्यक्ष और सीएमओ स्वयं संभालें।
नोटिस के बाद कर्मचारियों का तीखा रुख
हड़ताली सफाईकर्मियों का कहना है कि वे लंबे समय से अपनी विभिन्न मांगों को लेकर संघर्ष कर रहे हैं, लेकिन उनकी समस्याओं के समाधान की दिशा में गंभीरता से कोई कदम नहीं उठाया गया। कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि मांगों पर चर्चा करने और समाधान निकालने के बजाय नगरपालिका प्रशासन द्वारा आधी रात को नोटिस जारी कर दबाव बनाने की कोशिश की गई है।
सफाईकर्मियों ने कहा कि उन्हें नोटिस जारी होने की जानकारी बाद में मिली। उन्होंने स्पष्ट कहा कि यदि नगरपालिका के जिम्मेदार अधिकारी दबाव की राजनीति करेंगे तो कर्मचारी भी पीछे हटने वाले नहीं हैं।
60 कर्मचारी हटे, 40 की मौत, फिर भी नहीं हुई नई भर्ती
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान सफाई कर्मचारियों ने नगरपालिका में सफाई अमले की लगातार कमी का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया। कर्मचारियों के अनुसार पूर्व के नगरपालिका अध्यक्षों के कार्यकाल में भी वाल्मीकि समाज के लोगों की सफाईकर्मियों के रूप में नियुक्तियां हुई थीं।
उन्होंने बताया कि वर्तमान परिषद के कार्यकाल के दौरान करीब 60 कर्मचारियों को हटा दिया गया, जबकि लगभग 40 सफाईकर्मियों की मृत्यु हो चुकी है, लेकिन उनकी जगह नई नियुक्तियां नहीं की गईं। इससे नगरपालिका के सफाई अमले पर लगातार अतिरिक्त दबाव बढ़ता जा रहा है।
कर्मचारियों का कहना है कि प्रदेश की अन्य नगरपालिकाओं और नगर परिषदों में सफाई कर्मचारियों की भर्ती की प्रक्रिया चल रही है, लेकिन शिवपुरी नगरपालिका में लंबे समय से नई भर्ती नहीं की गई है।
नियमितीकरण-विनियमिती करण की मांग भी अधूरी
हड़ताली सफाईकर्मियों ने आरोप लगाया कि लंबे समय से कार्यरत कर्मचारियों के नियमितीकरण एवं विनियमितीकरण को लेकर भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। कर्मचारियों का कहना है कि वर्षों से सेवा देने के बावजूद उन्हें अपने भविष्य और नौकरी की सुरक्षा को लेकर संघर्ष करना पड़ रहा है।
सफाईकर्मियों ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि जब तक उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार कर समाधान नहीं निकाला जाता, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।
शहर में बढ़ते जा रहे गंदगी के अंबार
हड़ताल का सबसे ज्यादा असर अब शहर की सफाई व्यवस्था पर पड़ रहा है। शिवपुरी के प्रमुख बाजारों, सड़कों, कॉलोनियों और मोहल्लों में जगह-जगह कचरे के ढेर जमा होते जा रहे हैं। कई स्थानों पर कई दिनों से कचरा नहीं उठाया गया है, जिससे आम नागरिकों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
नगरपालिका और सफाई कर्मचारियों के बीच जारी इस गतिरोध का खामियाजा फिलहाल शहर की जनता को भुगतना पड़ रहा है। लोगों को चिंता है कि यदि जल्द ही हड़ताल समाप्त नहीं हुई तो गंदगी की समस्या और गंभीर रूप ले सकती है।
बरसात में दबा कचरा, मौसम खुलते ही बढ़ेगी परेशानी
लगातार बारिश के कारण शहर में फैला कचरा कई स्थानों पर दबा हुआ था, इसलिए गंदगी उतनी अधिक दिखाई नहीं दे रही थी। लेकिन अब मौसम साफ होने के साथ ही सड़कों और गलियों में जमा कचरा सूखने लगा है।
ऐसे में सूखा कचरा हवा के साथ उड़कर शहर की सुंदरता को और बिगाड़ सकता है। वहीं बदबू और अस्वच्छता की समस्या भी बढ़ने की आशंका है। यदि जल्द सफाई व्यवस्था बहाल नहीं हुई तो आने वाले दिनों में हालात और अधिक खराब हो सकते हैं।
अब निगाहें समाधान पर
एक ओर नगरपालिका प्रशासन हड़ताली कर्मचारियों को नोटिस जारी कर काम पर लौटने का दबाव बना रहा है, तो दूसरी ओर सफाईकर्मी अपनी मांगों को लेकर आंदोलन जारी रखने पर अड़े हुए हैं। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर शहर की सफाई व्यवस्था कब पटरी पर लौटेगी और नगरपालिका प्रशासन व सफाई कर्मचारियों के बीच चल रहा यह गतिरोध कब समाप्त होगा।
फिलहाल शिवपुरी शहर गंदगी के बढ़ते ढेरों के बीच इस विवाद के समाधान का इंतजार कर रहा है।


