राजापुरावार्ड घनी आबादी वाला क्षेत्र है। यहां आंगनवाड़ी एक जर्जर और नीचे बने कमरे में लगती है। नाली का पानी और बारिश का पानी सीधे केंद्र में घुस जाता है।
फोटो में साफ दिख रहा है कि अंदर फर्श पर कीचड़ वाला पानी भरा है। दीवारें सीली हैं। बच्चे गीले पैरों से बैठे हैं। कार्यकर्ता और सहायिका पानी निकाल-निकाल कर थक गई हैं।
गर्भवती महिलाएं टीकाकरण के लिए आती हैं तो उन्हें भी इसी पानी से होकर गुजरना पड़ता है। पोषण आहार - दाल, चावल, खिचड़ी भी इसी गंदे पानी के पास बनती है। संक्रमण का खतरा बना हुआ है वार्ड की महिलाओं ने बताया - "हम बच्चों को आंगनवाड़ी भेजते हैं कि कुछ सीखेंगे, खाना मिलेगा। पर यहां तो बच्चे भीग कर आते हैं। 2-3 बच्चे तो इसी गंदे पानी से फिसलकर चोटिल भी हो चुके हैं। बुखार, सर्दी-खांसी आम हो गई है महिला बाल विकास विभाग आखिर क्यों नहीं दे रहा ध्यान सवाल बड़ा है।
हर साल आंगनवाड़ी भवनों की मरम्मत के लिए बजट आता है, वो कहां जाता है? राजापुरा जैसे नगरीय वार्ड में भवन किराये पर भी लिया जा सकता है, फिर क्यों नहीं लिया जा रहा CDPO कोलारस और पर्यवेक्षक ने आज तक मौके का निरीक्षण क्यों नहीं किया?
सूत्रों के अनुसार वार्ड 12 की आंगनवाड़ी कई साल से इसी जर्जर भवन में चल रही है। नगर परिषद कोलारस और महिला बाल विकास दोनों एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डाल रहे हैं।वार्डवासियों ने एसडीएम कोलारस और जिला कार्यक्रम अधिकारी महिला बाल विकास से मांग की है कि कोलारस के वार्ड क्रमांक 12 के राजापुरा आंगनवाड़ी का तत्काल निरीक्षण कर पक्की व्यवस्था करें


