शिवपुरी। अपनी विभिन्न मांगों को लेकर जिले के अतिथि शिक्षकों ने आज शिवपुरी में तिरंगा यात्रा एवं रैली निकालकर जोरदार प्रदर्शन किया। अतिथि शिक्षक हाथों में तिरंगा और अपनी मांगों से जुड़े संदेश लेकर सड़कों पर निकले तथा बाद में मुख्यमंत्री के नाम जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा।
अतिथि शिक्षकों का कहना है कि वर्षों से वे सरकारी स्कूलों में शिक्षण कार्य कर रहे हैं, लेकिन आज भी उनके भविष्य और रोजगार को लेकर स्थायी व्यवस्था नहीं की गई है। शिक्षकों ने सरकार के सामने सवाल उठाते हुए कहा कि “वादे बहुत हुए, घोषणाएं भी हुईं, लेकिन अब तक स्थायी नौकरी का सपना अधूरा क्यों है?”
अतिथि शिक्षकों की प्रमुख मांगें
ज्ञापन में अतिथि शिक्षकों ने सरकार के समक्ष कई महत्वपूर्ण मांगें रखीं—
नियमित शिक्षक आने पर अतिथि शिक्षकों को सेवा से नहीं हटाया जाए।
अतिथि शिक्षकों का सेवाकाल 12 माह किया जाए।
विभागीय परीक्षा आयोजित कर अतिथि शिक्षकों को नियमित किया जाए।
पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा महापंचायत में अतिथि शिक्षकों के संबंध में की गई घोषणाओं और वादों को पूरा किया जाए।
शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह द्वारा सोशल मीडिया के माध्यम से आकस्मिक अवकाश (CL) को लेकर कही गई बात पर आधिकारिक आदेश जारी कर मंजूरी दी जाए।
‘समान कार्य, समान वेतन’ के सिद्धांत के आधार पर उचित वेतन दिया जाए।
‘घोषणाएं कहां गईं, अतिथि शिक्षक पूछ रहे जवाब’
अतिथि शिक्षकों ने विशेष रूप से पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के कार्यकाल के दौरान हुई महापंचायत और वहां अतिथि शिक्षकों को लेकर की गई घोषणाओं का मुद्दा उठाया। शिक्षकों का कहना है कि उस समय उनके भविष्य, रोजगार सुरक्षा और नियमितीकरण को लेकर उम्मीदें जगाई गई थीं।
अब अतिथि शिक्षकों का सवाल है कि वे घोषणाएं और वादे आखिर किस फाइल में दबकर रह गए?
शिक्षकों ने दो टूक शब्दों में कहा—
“हमें सिर्फ आश्वासन नहीं चाहिए, हमें नौकरी की सुरक्षा चाहिए।”
उनका कहना है कि वर्षों तक स्कूलों में पढ़ाने के बावजूद हर सत्र में रोजगार को लेकर असमंजस बना रहता है। नियमित शिक्षक की नियुक्ति होने पर सेवा समाप्त होने की चिंता अलग बनी रहती है। ऐसे में अतिथि शिक्षकों ने सरकार से स्थायी नीति बनाने की मांग की है।
‘पढ़े-लिखे युवाओं को सिर्फ इंतजार क्यों?’
रैली के दौरान अतिथि शिक्षकों ने सवाल उठाया कि जब वे वर्षों से शिक्षा विभाग में अपनी सेवाएं दे रहे हैं तो उनके अनुभव और योगदान को स्थायी व्यवस्था में शामिल क्यों नहीं किया जा रहा है?
उनका कहना है कि—
“हमें वादे नहीं चाहिए, हमें रोजगार चाहिए… हमें केवल इंतजार नहीं, भविष्य की सुरक्षा चाहिए।”
शिवपुरी के साथियों से भी अपील
आंदोलन से जुड़े अतिथि शिक्षकों ने शिवपुरी जिले में रहने वाले अपने सभी साथियों से अपील की कि वे आंदोलन में अधिक से अधिक संख्या में जुड़ें और एक-दूसरे से संपर्क कर अपनी मांगों को मजबूती से सरकार तक पहुंचाएं।
अब सरकार के फैसले पर नजर
तिरंगा यात्रा के माध्यम से ज्ञापन सौंपने के बाद अब अतिथि शिक्षकों की निगाह सरकार के अगले कदम पर टिकी हुई है। बड़ा सवाल यही है कि वर्षों से नियमितीकरण और सेवा सुरक्षा की मांग कर रहे अतिथि शिक्षकों को आखिर कब ठोस राहत मिलेगी?
अतिथि शिक्षकों का सवाल—
“महापंचायत में हुए वादों का क्या हुआ? घोषणाएं कब जमीन पर उतरेंगी?”
शिवपुरी के अतिथि शिक्षकों ने स्पष्ट संदेश दिया है—अब केवल आश्वासन नहीं, बल्कि रोजगार की स्थायी गारंटी और मांगों पर ठोस निर्णय चाहिए।


