मड़ीखेड़ा बांध के जलद्वार खोले : शाम 3:30 बजे सिंध नदी में छोड़ा गया 1100 क्यूमेक पानी, नदी किनारे बसे गांवों के लिए अलर्ट जारी

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 शिवपुरी। जिले में लगातार हो रही जल आवक के चलते अटल सागर मड़ीखेड़ा बांध का जलस्तर बढ़ रहा है। बांध में लगातार पानी की आवक को देखते हुए जलस्तर को नियंत्रित एवं स्थिर बनाए रखने के लिए सिंध परियोजना संभाग मड़ीखेड़ा द्वारा महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया है।

जानकारी के अनुसार 4 सितंबर 2026 को शाम 3:30 बजे से मड़ीखेड़ा बांध के जलद्वार खोले गये , जिसके बाद बांध से लगभग 1100 क्यूमेक पानी सिंध नदी में छोड़ा जाएगा।

बांध के जलद्वार खुलने और भारी मात्रा में पानी छोड़े जाने के निर्णय के बाद प्रशासन एवं सिंध परियोजना विभाग ने सिंध नदी के किनारे बसे गांवों के लोगों के लिए सतर्कता अलर्ट जारी किया है। लोगों से अपील की गई है कि वे किसी भी स्थिति में नदी किनारे न जाएं और बच्चों एवं पशुओं को भी नदी के आसपास जाने से रोकें।

अचानक जलस्तर बढ़ने की संभावना को देखते हुए नदी किनारे रहने वाले ग्रामीणों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। प्रशासन ने कहा है कि बांध से पानी छोड़े जाने के बाद सिंध नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ सकता है, इसलिए नदी के आसपास आवाजाही करना खतरनाक साबित हो सकता है।

मड़ीखेड़ा बांध से प्रभावित होने वाले क्षेत्र

मड़ीखेड़ा बांध से पानी छोड़े जाने के कारण प्रभावित होने वाले क्षेत्रों में मड़ीखेड़ा, धमकन, पचपेड़िया, कल्याणपुर, नानकपुर, सुल्तानपुर और पवा गांव शामिल हैं।

वहीं मोहनी पिकअप वियर क्षेत्र में भी जलस्तर बढ़ने की संभावना जताई गई है। यहां प्रभावित गांवों में ख्यावदा, साबोली, सुडा, धमधौली, सीहोर, निहाबारा, सुड, पनघटा, मगरोनी और पुलाहा शामिल हैं।

सिंध परियोजना संभाग मड़ीखेड़ा के कार्यपालन यंत्री द्वारा सभी प्रभावित क्षेत्रों के ग्रामीणों से अपील की गई है कि वे पूरी तरह सतर्क रहें और नदी के किनारे जाने से बचें।

प्रशासन की अपील—सावधानी ही सुरक्षा

बांध के जलद्वार खुलने के बाद सिंध नदी में पानी का बहाव और जलस्तर तेजी से बढ़ सकता है। ऐसे में स्थानीय लोगों से अपील की गई है कि वे नदी पार करने, नदी में नहाने, मछली पकड़ने या किसी भी अन्य कार्य के लिए नदी किनारे न जाएं।

मड़ीखेड़ा बांध के जलद्वार आज शाम 3:30 बजे से खोले जाएंगे और सिंध नदी में 1100 क्यूमेक पानी छोड़ा जाएगा। ऐसे में नदी किनारे बसे गांवों के लोगों को विशेष रूप से सतर्क रहने की आवश्यकता है

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