शिवपुरी। नरवर तहसील के ग्राम कालीपहाड़ी मेड़ा में शासकीय पहाड़ पर प्रस्तावित क्रेशर एवं खनन गतिविधियों को लेकर ग्रामीणों का विरोध तेज हो गया है। बुधवार को बड़ी संख्या में ग्रामीण और युवा जिला कलेक्ट्रेट पहुंचे, जहां उन्होंने कलेक्टर अर्पित वर्मा के नाम ज्ञापन सौंपते हुए सर्वे नंबर 929 स्थित शासकीय पहाड़ी क्षेत्र में प्रस्तावित अथवा स्वीकृत क्रेशर लीज को तत्काल निरस्त करने की मांग की।
ग्रामीणों ने जनहित, पर्यावरण संरक्षण, ग्रामीणों की सुरक्षा एवं धार्मिक आस्था का हवाला देते हुए प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि संबंधित पहाड़ी क्षेत्र गांव के लिए महत्वपूर्ण प्राकृतिक संसाधन है और यहां खनन व क्रेशर गतिविधियां शुरू होने से गांव के अस्तित्व और पर्यावरण पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है।
20.87 हेक्टेयर शासकीय पहाड़ को लेकर विवाद
ग्रामीणों के अनुसार सर्वे नंबर 929 में करीब 20.87 हेक्टेयर शासकीय पहाड़ी क्षेत्र स्थित है। ग्रामीणों का कहना है कि इस पहाड़ पर प्राचीन सिद्धबाबा मंदिर एवं धाती बाबा का धार्मिक स्थल भी मौजूद है, जहां लंबे समय से ग्रामीणों द्वारा पूजा-अर्चना एवं धार्मिक गतिविधियां की जाती रही हैं।
ग्रामीणों ने आशंका जताई कि यदि पहाड़ी क्षेत्र में क्रेशर और खनन का कार्य शुरू होता है तो इससे धार्मिक स्थल एवं क्षेत्र की प्राकृतिक संरचना प्रभावित हो सकती है। ग्रामीणों ने प्रशासन से धार्मिक आस्था और पर्यावरणीय महत्व को ध्यान में रखते हुए लीज प्रक्रिया की जांच कराने की मांग की है।
आबादी के पास क्रेशर लगाने का विरोध
ज्ञापन में ग्रामीणों ने बताया कि प्रस्तावित क्षेत्र के आसपास गांव की बड़ी आबादी निवास करती है। ऐसे में यदि यहां गिट्टी क्रेशर एवं खनन गतिविधियां शुरू होती हैं तो धूल, ध्वनि और अन्य प्रकार के प्रदूषण से ग्रामीणों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका है।
ग्रामीणों ने दमा सहित श्वसन संबंधी बीमारियों का खतरा जताते हुए कहा कि लगातार उड़ने वाली धूल और प्रदूषण से बच्चों, बुजुर्गों एवं आम नागरिकों को परेशानी हो सकती है। वहीं खनन के दौरान ब्लास्टिंग होने की स्थिति में आसपास के मकानों में दरारें आने और कच्चे मकानों को नुकसान पहुंचने की भी आशंका व्यक्त की गई।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि खनन गतिविधियां शुरू होती हैं तो गांव के लोगों को गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है और कई परिवारों के सामने पलायन जैसी स्थिति भी निर्मित हो सकती है।
वर्ष 2023 में भी दर्ज कराई गई थी आपत्ति
ग्रामीणों ने बताया कि क्रेशर लीज से संबंधित प्रक्रिया को लेकर ग्राम पंचायत स्तर पर पूर्व में भी आपत्ति दर्ज कराई जा चुकी है। ज्ञापन के अनुसार वर्ष 2023 में ग्राम पंचायत कालीपहाड़ी मेड़ा की तत्कालीन सरपंच द्वारा भी आपत्ति दर्ज कराई गई थी।
ग्रामीणों का आरोप है कि पूर्व में दर्ज कराई गई आपत्ति के निराकरण की जानकारी ग्रामवासियों को नहीं दी गई। साथ ही ग्रामीणों ने दावा किया कि इस महत्वपूर्ण विषय पर ग्रामसभा की सहमति को लेकर भी स्थिति स्पष्ट नहीं की गई।
नापतौल के दौरान विवाद और धमकाने के आरोप
ग्रामीणों ने ज्ञापन में आरोप लगाया कि 30 अगस्त 2026 को कुछ लोग वाहनों एवं नापतौल संबंधी उपकरणों के साथ पहाड़ी क्षेत्र में पहुंचे थे। ग्रामीणों के अनुसार पूछताछ करने पर क्रेशर से संबंधित प्रक्रिया चलने की जानकारी दी गई।
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि विरोध करने पर उन्हें धमकाने का प्रयास किया गया। ज्ञापन में ग्रामीणों ने इस मामले में कुछ अधिकारियों-कर्मचारियों के व्यवहार को लेकर भी शिकायत दर्ज कराई है। ग्रामीणों ने पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच कराए जाने और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ आवश्यक कार्रवाई की मांग की है।
कलेक्टर से जांच और तत्काल रोक लगाने की मांग
ग्रामीणों ने कलेक्टर अर्पित वर्मा से मांग की है कि सर्वे नंबर 929 स्थित शासकीय पहाड़ी क्षेत्र की वास्तविक स्थिति की मौके पर जाकर जांच कराई जाए। साथ ही जनहित, पर्यावरण, ग्रामीणों की सुरक्षा और धार्मिक स्थलों की संवेदनशीलता को देखते हुए क्रेशर लीज की प्रक्रिया पर तत्काल रोक लगाने की मांग की गई है।
ज्ञापन देने के दौरान बड़ी संख्या में ग्रामीण एवं युवा मौजूद रहे। ग्रामीणों ने स्पष्ट कहा कि वे विकास के विरोधी नहीं हैं, लेकिन आबादी के नजदीक, प्राकृतिक पहाड़ी और धार्मिक स्थलों से जुड़े क्षेत्र में होने वाली गतिविधियों को लेकर प्रशासन को सभी पहलुओं की गंभीरता से जांच करनी चाहिए।
अब इस पूरे मामले में प्रशासन की जांच और आगामी कार्रवाई पर ग्रामीणों की नजर टिकी हुई है। कालीपहाड़ी मेड़ा का यह मामला केवल क्रेशर लीज तक सीमित नहीं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण, ग्रामीणों की सुरक्षा और धार्मिक आस्था से भी जुड़ा हुआ है।


