नरवर/शिवपुरी। नरवर तहसील के ग्राम अमरपुर में शासकीय पट्टे की भूमि को लेकर चल रहे विवाद में कलेक्टर न्यायालय, जिला शिवपुरी द्वारा महत्वपूर्ण आदेश पारित किया गया है। मामले में 20 अप्रैल 2006 को हुए पंजीकृत विक्रय को मध्यप्रदेश भू-राजस्व संहिता, 1959 के प्रावधानों के विपरीत पाया गया। न्यायालय ने विवादित भूमि को शासन के नाम राजस्व अभिलेखों में दर्ज करने और संबंधित कब्जाधारियों को बेदखल करने की कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। वहीं, कल्लू कुशवाह ने प्रशासन से मामले में उचित कार्रवाई कर न्याय दिलाने की मांग की है।
क्या हैं मामले में आरोप?
मामले में आवेदक पक्ष की ओर से कहा गया कि ग्राम अमरपुर स्थित सर्वे क्रमांक 448/1 एवं 462/5 की भूमि उनके पूर्वज को शासकीय पट्टे के रूप में आवंटित की गई थी। आरोप है कि सक्षम प्राधिकारी की पूर्व अनुमति के बिना 20 अप्रैल 2006 को उक्त भूमि का पंजीकृत विक्रय कर दिया गया।
आवेदक पक्ष ने विक्रय-पत्र को शून्य घोषित करने और भूमि का कब्जा वापस दिलाने की मांग की थी। यह पक्ष का दावा था, जिस पर न्यायालय में सुनवाई की गई।
कलेक्टर न्यायालय का क्या है आदेश?
प्रकरण की सुनवाई और उपलब्ध अभिलेखों के परीक्षण के बाद कलेक्टर न्यायालय ने संबंधित भूमि के अंतरण को वैधानिक प्रावधानों के विपरीत पाया। आदेश में विवादित भूमि को शासन के नाम राजस्व अभिलेखों में दर्ज करने के निर्देश दिए गए हैं।
इसके साथ ही संबंधित राजस्व अधिकारियों को लागू कानूनी प्रावधानों के तहत कब्जाधारियों को बेदखल करने की कार्रवाई करने और भूमि को शासन के पक्ष में सुरक्षित करने के निर्देश दिए गए हैं। कार्रवाई का अनुपालन प्रतिवेदन भी न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत करना होगा।
स्पष्ट अंतर: भूमि के विक्रय पर आपत्ति और पूर्वज के नाम पट्टा होने का दावा आवेदक पक्ष की ओर से रखा गया था। वहीं, भूमि को शासन के नाम दर्ज करने तथा कब्जा हटाने की कार्रवाई के निर्देश कलेक्टर न्यायालय के आदेश का हिस्सा हैं।
कल्लू कुशवाह बोले—सरकार जमीन खाली कराए या हमारा हक दिलाए
मामले को लेकर कल्लू कुशवाह ने कहा कि उनके पिता के नाम जमीन का पट्टा है। यदि शासन ने जमीन को सरकारी घोषित कर दिया है, तो प्रशासन को आदेश के अनुसार अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई करनी चाहिए। साथ ही, उनके परिवार के पट्टे और वैधानिक अधिकारों की भी जांच कर उचित निर्णय लिया जाना चाहिए।
कल्लू कुशवाह के मुताबिक, “अगर सरकार ने जमीन को सरकारी कर दिया है, तो उसका अतिक्रमण हटाना चाहिए या फिर हमें हमारा हक मिलना चाहिए। हमारे पिताजी के नाम पट्टा है। सरकार हमारी सुनवाई करे और हमें न्याय दिलाए।”
उन्होंने प्रशासन से मांग की कि संबंधित पट्टे, राजस्व अभिलेखों और न्यायालय के आदेश का परीक्षण कर मामले का नियमानुसार निराकरण किया जाए।
अब प्रशासन की कार्रवाई पर निगाहें
कलेक्टर न्यायालय के निर्देशों के बाद अब संबंधित राजस्व विभाग की कार्रवाई महत्वपूर्ण होगी। भूमि को शासन के नाम दर्ज करने, मौके पर कब्जे की स्थिति स्पष्ट करने और बेदखली संबंधी निर्देशों का पालन किस प्रकार किया जाता है, यह आगे की कार्रवाई से स्पष्ट होगा।


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