क्या था पूरा मामला?
ग्राम मनपुरा का प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पिछले कई महीनों से भगवान भरोसे चल रहा था। ग्रामीणों के अनुसार PHC में डॉक्टर अनुपस्थित रहते थे। केवल एक संविदा कर्मी के भरोसे OPD चल रही थी, जिससे गर्भवती महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों को 25 किलोमीटर दूर शिवपुरी या पिछोर जाना पड़ता था। ग्रामीणों ने कई बार CMHO और जनपद स्तर पर शिकायत की, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई।
आखिर में मजबूर होकर दिनेश सगर ने 1 अक्टूबर से मानपुर बस स्टैंड पर टेंट लगाकर भूख हड़ताल शुरू की। उनकी दो ही प्रमुख मांगें थीं - 1. मनपुरा PHC पर 24 घंटे डॉक्टर की उपलब्धता सुनिश्चित हो और 2. नियमित OPD सुबह 9 से शाम 5 बजे तक शुरू की जाए।
स्वास्थ्य विभाग ने जारी किया आदेश
7वें दिन मंगलवार देर शाम मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) शिवपुरी द्वारा आदेश क्रमांक CMHO/शिव/2026/487 जारी किया गया। आदेश में मनपुरा PHC की व्यवस्थाओं को सुचारू करने के लिए 6 कर्मचारियों को आगामी आदेश तक पदस्थ किया गया है।
आदेश में इन 6 कर्मचारियों के नाम हैं:
1. डॉ. अनिल कुमार - चिकित्सा अधिकारी
2. स्टाफ नर्स रीना कुशवाह - स्टाफ नर्स
3. रोहित शर्मा - फार्मासिस्ट
4. मोहन लाल - लैब टेक्नीशियन
5. सविता यादव - ANM
6. राहुल कुशवाह - वार्ड बॉय
आदेश में कहा गया है कि सभी कर्मचारी 8 अक्टूबर 2026 से अपना कार्यभार ग्रहण कर सेवाएं संचालित करेंगे। अब मनपुरा PHC में 24x7 आपात चिकित्सा सेवा और नियमित OPD शुरू होगी।
प्रशासन ने क्या कहा?
CMHO कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार, ग्रामीणों की मांगों को गंभीरता से लेते हुए तत्काल यह पदस्थापना की गई है। जल्द ही दवाओं की उपलब्धता और प्रसव संबंधित सेवाएं भी शुरू की जाएंगी।
समर्थकों ने बताया - ये संघर्ष की जीत है, लोकतंत्र की जीत है
इस आदेश के बाद दिनेश सगर के समर्थकों और ग्रामीणों में खुशी की लहर है। समर्थकों ने इसे संघर्ष की सफलता बताया है। दिनेश सगर ने कहा कि "आमजन को स्वास्थ्य सेवाएं अब समय पर मिल सकेंगी, यही लोकतंत्र की जीत है। यह किसी एक व्यक्ति की जीत नहीं, पूरे मनपुरा क्षेत्र की जीत है।"
स्थानीय ग्रामीणों ने भी स्वास्थ्य विभाग के इस निर्णय का स्वागत किया है और कहा है कि अब गांव में गर्भवती महिलाओं, बच्चों एवं बुजुर्गों को उपचार के लिए 25 किमी दूर शिवपुरी नहीं जाना पड़ेगा। गांव में प्राथमिक उपचार और टीकाकरण अब संभव हो सकेगा।
ग्रामीणों ने राहत की सांस लेते हुए कहा कि 7 दिन तक चली इस भूख हड़ताल ने साबित कर दिया कि अगर मांग जायज हो तो प्रशासन को झुकना ही पड़ता है।


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