ग्रामीणों ने बताया कि यह मार्ग लगभग 3 किलोमीटर लंबा शासकीय रास्ता है, जिससे आसपास के कई गांवों का संपर्क जुड़ा हुआ है। मार्ग खराब होने के कारण ग्रामीणों को इधर-उधर के रास्तों से होकर आना-जाना पड़ रहा है। खेतों का पानी भी इसी रास्ते में बहने से स्थिति और खराब हो गई है।
रास्ता क्षतिग्रस्त होने से किसान अपने कृषि उपकरण और साधन खेतों तक नहीं ले जा पा रहे, जिससे खेती का कार्य प्रभावित हो रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने कई बार संबंधित अधिकारियों, सचिव एवं सरपंच को इस समस्या से अवगत कराया, लेकिन दो वर्षों से केवल आश्वासन ही मिल रहा है, कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।
परेशान ग्रामीणों ने अब प्रशासन से मांग की है कि मौके की निष्पक्ष जांच कराई जाए और तत्काल उक्त रास्ते में मुरम डलवाकर सुधार कार्य कराया जाए, साथ ही इसे डामर (पक्की) सड़क के रूप में विकसित किया जाए, ताकि ग्रामीणों को राहत मिल सके।
ग्रामीणों को उम्मीद है कि प्रशासन उनकी समस्या को गंभीरता से लेते हुए शीघ्र कार्रवाई करेगा।


