भूख-प्यास से तड़पकर हो रही मौतें, जांच व सख्त कार्रवाई की मांग
शिवपुरी जिले की करैरा तेहसील के अंतर्गत ग्राम पंचायत थदरा में बनी गौशाला की स्थिति अत्यंत भयावह सामने आई है। यह स्थान अब गौ-सेवा का केंद्र नहीं, बल्कि गोवंशों के लिए श्मशान घाट बनता जा रहा है। गौशाला परिसर व आसपास बने गड्ढों में मृत गोवंश पड़े मिले, वहीं कई गोवंश गंभीर अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच संघर्ष करते दिखाई दिए। यह दृश्य किसी भी संवेदनशील व्यक्ति की आत्मा को झकझोर देने वाला है।स्थानीय गौसेवक कल्लू महाराज ने गौशाला का निरीक्षण कर गंभीर अनियमितताओं का खुलासा किया। उनके अनुसार गौशाला में गोवंशों के लिए खाने-पीने की कोई समुचित व्यवस्था नहीं है। न पर्याप्त भूसा उपलब्ध है और न ही स्वच्छ पानी। जो थोड़ा-बहुत चारा दिया जा रहा है, वह सड़ा-गला है। परिणामस्वरूप गोवंश भूख-प्यास से तड़पकर दम तोड़ रहे हैं।सबसे गंभीर आरोप यह है कि गौशालाओं के नाम पर शासन से आने वाली राशि का खुलेआम दुरुपयोग किया जा रहा है। कल्लू महाराज का कहना है कि गौ माता के लिए आने वाली भोजन सामग्री को बाजार में बेच दिया जाता है और उससे संचालकों के निजी खर्च पूरे किए जाते हैं। गौशाला में कार्यरत दो कर्मचारियों को प्रति व्यक्ति 8-8 हजार रुपये वेतन दिए जाने की बात सामने आई है, लेकिन गोवंशों के पालन-पोषण पर नाममात्र भी राशि खर्च नहीं की जा रही।
निरीक्षण के दौरान यह भी पाया गया कि मृत गोवंशों का विधि-पूर्वक अंतिम संस्कार तक नहीं किया गया। गौशाला के पीछे और आसपास मृत गोवंशों को यूं ही फेंक दिया गया, जहां कुत्ते और अन्य जानवर उन्हें नोचते रहे। यह कृत्य न केवल अमानवीय है, बल्कि धार्मिक भावनाओं और पशु-कल्याण कानूनों का घोर उल्लंघन भी है। बताया जा रहा है कि इस गौशाला से कुछ दबंग लोग जुड़े हुए हैं, जिनके दबाव में अब तक शिकायतें दबती रही हैं।
गौसेवक कल्लू महाराज ने शिवपुरी कलेक्टर रविंद्र कुमार चौधरी एवं करैरा एसडीएम अनुराग निगवाल से मांग की है कि गौशाला का तत्काल निरीक्षण कराया जाए, मृत गोवंशों की स्वतंत्र व निष्पक्ष जांच हो तथा दोषियों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए। साथ ही उन्होंने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से अपील की है कि इस प्रकरण को संज्ञान में लेकर प्रदेशभर की गौशालाओं में विशेष जांच अभियान चलाया जाए।
उन्होंने कहा कि कागजों में गौ-सेवा दिखाई जाती है, जबकि जमीनी हकीकत इसके बिल्कुल विपरीत है। गौवंश के नाम पर केवल दिखावा हो रहा है, सेवा नहीं। बेजुबान गौ माता पर इसलिए अत्याचार हो रहा है क्योंकि वह बोल नहीं सकती, अपनी पीड़ा शब्दों में व्यक्त नहीं कर सकती—वह सिर्फ अपनी आंखों से आंसू बहा सकती है।
अब समय आ गया है कि शासन-प्रशासन और जनप्रतिनिधि संवेदनशीलता दिखाएं, क्योंकि यदि गौशालाएं नहीं बचीं, तो गौ माता भी सुरक्षित नहीं रह पाएगी।


