प्राप्त जानकारी के अनुसार, मनोज जाटव पुत्र हरीराम जाटव निवासी ग्राम डंगौसरा अपने ईको वाहन क्रमांक MP08 ZJ 4676 से जा रहे थे। थाना रन्नौद पुलिस द्वारा वाहन रोककर ₹500 का चालान किया गया। चालान के संबंध में पूछताछ करने पर मौके पर मौजूद पुलिसकर्मी उग्र हो गए और मारपीट शुरू कर दी।
आरोप है कि आरक्षक अवधेश शर्मा, दशरथ सिंह राजपूत, सिद्धनाथ एवं अन्य पुलिसकर्मियों ने मनोज जाटव, नीलेश जाटव, जीतू जाटव, रामप्यारी जाटव के साथ लात-घूंसे व डंडों से मारपीट की। इस दौरान नीलेश जाटव के सिर पर सर्विस पिस्टल के बट से वार किए जाने की भी बात कही गई है। वहीं मनोज जाटव की पत्नी प्रियंका जाटव (गर्भवती) को पेट पर लात मारे जाने से वह बेहोश होकर गिर पड़ीं।
बताया गया कि घटना का वीडियो बनाए जाने पर पुलिसकर्मियों ने मोबाइल छीनकर वीडियो डिलीट कर दिया। घटना के विरोध में स्थानीय लोगों ने चक्का जाम कर दिया, जिसके बाद मौके पर एसडीएम एवं एसडीओपी पहुंचे। दोनों पक्षों का मेडिकल परीक्षण उप-स्वास्थ्य केंद्र बदरवास में कराया गया।
आरोप है कि पुलिस ने दोषी कर्मियों के विरुद्ध कार्यवाही करने के बजाय पीड़ितों के खिलाफ ही झूठी एफआईआर दर्ज कर ली, जिससे क्षेत्र में आक्रोश का माहौल है।
बहुजन समाज पार्टी ने इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच, पीड़ितों पर दर्ज एफआईआर निरस्त करने एवं दोषी पुलिसकर्मियों के विरुद्ध एफआईआर दर्ज करने की मांग की है।


