रन्नौद में एक गर्भवती महिला के साथ हुई गंभीर घटना को लेकर भाजपा जिला अध्यक्ष जसवंत जाटव द्वारा पीड़ित के पक्ष में आवाज़ उठाए जाने के बाद, सोशल मीडिया पर उनके खिलाफ आपत्तिजनक और भ्रामक टिप्पणियां की जा रही हैं। कुछ लोग इस मानवीय पहल को राजनीति से जोड़कर देखने की कोशिश कर रहे हैं, जिस पर अब सवाल उठने लगे हैं।
स्थानीय लोगों और समर्थकों का कहना है कि किसी जघन्य अपराध के खिलाफ खड़ा होना कोई राजनीतिक एजेंडा नहीं, बल्कि एक जनप्रतिनिधि की नैतिक और सामाजिक जिम्मेदारी होती है। जसवंत जाटव ने पीड़ित महिला के साथ न्याय की मांग उठाकर यह संदेश दिया कि कानून और मानवता सबसे ऊपर है।
वहीं, सोशल मीडिया पर हो रही बयानबाज़ी को लेकर यह चर्चा भी तेज हो गई है कि क्या इस पूरे मामले में जातिगत मानसिकता हावी हो रही है। समर्थकों का कहना है कि बिना तथ्यों के किसी जनप्रतिनिधि को नीचा दिखाने की कोशिश निंदनीय है और इससे समाज में गलत संदेश जाता है।
राजनीतिक जानकारों के अनुसार, अपराध के खिलाफ एकजुट होकर आवाज़ उठाने की आवश्यकता है, न कि उसे जाति या राजनीति के चश्मे से देखने की। फिलहाल, यह मामला प्रशासनिक कार्रवाई और निष्पक्ष जांच की मांग के साथ चर्चा में बना हुआ है।


