घटना के समय उप स्वास्थ्य केंद्र में मौजूद कर्मचारियों ने जब शीतल सिसोदिया की हालत बिगड़ती देखी तो तत्काल उन्हें बेहोशी की हालत में खरई अस्पताल ले जाया गया। वहां प्राथमिक उपचार के बाद हालत गंभीर होने पर उन्हें शिवपुरी मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया गया, जहां फिलहाल उनका इलाज जारी है।
हाजिरी के बावजूद थमाया गया नोटिस, मानसिक दबाव बना वजह
स्वास्थ्य केंद्र के कर्मचारियों के अनुसार, शीतल सिसोदिया ने अपनी ड्यूटी पूरी करने के बाद अटेंडेंस रजिस्टर में विधिवत हाजिरी भी दर्ज की थी। इसके बावजूद विभागीय अधिकारियों द्वारा उन्हें नोटिस थमा दिया गया। बताया जा रहा है कि इसी नोटिस के चलते वे मानसिक रूप से काफी परेशान थीं और इसी दबाव में उन्होंने यह खौफनाक कदम उठाया।
स्वास्थ्य विभाग की कार्यशैली पर सवाल
यह घटना स्वास्थ्य विभाग की संवेदनहीन कार्यप्रणाली को उजागर करती है, जहां फील्ड में काम करने वाले कर्मचारियों पर बिना तथ्य जांचे नोटिस जारी कर दिए जाते हैं। कर्मचारियों का कहना है कि पहले ही स्टाफ की कमी और कार्यभार के चलते मानसिक तनाव रहता है, ऊपर से इस तरह की कार्रवाई हालात को और बिगाड़ देती है।
जांच के आदेश, लेकिन जवाबदेही तय नहीं
मामले के सामने आने के बाद विभागीय स्तर पर जांच की बात कही जा रही है, लेकिन बड़ा सवाल यह है कि क्या दोषी अधिकारियों पर कोई ठोस कार्रवाई होगी या मामला फाइलों में दबकर रह जाएगा। अगर समय रहते कर्मचारियों की समस्याओं को गंभीरता से लिया जाता, तो शायद यह स्थिति पैदा ही नहीं होती।
फिलहाल शीतल सिसोदिया की हालत पर पूरे क्षेत्र की नजरें टिकी हुई हैं, वहीं यह घटना स्वास्थ्य विभाग के लिए एक चेतावनी है कि कर्मचारी भी इंसान होते हैं, मशीन नहीं।
इनका कहना है
हमारे द्वारा टीम गठित का जांच कराई जाएगी अब वह शिवपुरी मेडिकल कॉलेज में भर्ती है और ठीक है
संजय राठौर बीएमओ स्वास्थ केंद्र कोलारस


