ग्रामीणों के अनुसार, मंदिर परिसर की भूमि से अतिक्रमण हटाने के लिए पूर्व में पटवारी, तहसीलदार और एसडीएम सहित जिला प्रशासन को कई बार लिखित आवेदन दिए जा चुके हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। उनका कहना है कि स्थिति जस की तस बनी हुई है, जिससे लोगों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है।
बताया गया है कि 25 मार्च 2026 को ग्रामवासियों ने संबंधित अधिकारियों को अतिक्रमण हटाने के लिए अंतिम चेतावनी भी दी थी, लेकिन इसके बावजूद प्रशासन की ओर से कोई कदम नहीं उठाया गया।
🔸 मेले के आयोजन पर संकट
ग्रामीणों ने बताया कि 30 मार्च 2026 को मंदिर परिसर में परंपरागत भव्य मेले का आयोजन प्रस्तावित है, जिसमें लगभग 5 हजार से 10 हजार श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना रहती है। यह मेला सदियों से आयोजित होता आ रहा है और आसपास के कई गांवों के लोग इसमें भाग लेते हैं। वर्तमान में अतिक्रमण के कारण मेले की व्यवस्थाओं और श्रद्धालुओं की आवाजाही में गंभीर बाधा उत्पन्न होने की आशंका जताई जा रही है।
🔸 प्रशासन से त्वरित कार्रवाई की मांग
ग्रामीणों ने जनहित और कानून-व्यवस्था का हवाला देते हुए कलेक्टर से मांग की है कि मामले की तत्काल जांच कर मंदिर परिसर की भूमि से अवैध कब्जा हटाया जाए तथा दोषियों के खिलाफ विधिसम्मत कार्रवाई की जाए, ताकि धार्मिक कार्यक्रम और मेला शांतिपूर्ण व व्यवस्थित ढंग से संपन्न हो सके।


