कागजों में 'विकास', :
पंचायत में हुए इस बड़े फर्जीवाड़े की बानगी इन तीन बड़े कामों में साफ देखी जा सकती है:
बेलखेड़ी रोड पर पुलिया निर्माण: इस निर्माण कार्य के लिए 3.89 लाख रुपये की पूरी राशि निकाल ली गई, लेकिन मौके पर काम 'शून्य' है। पुलिया का नामोनिशान तक नहीं है।
हाई स्कूल सी.सी. रोड: स्कूल के बच्चों और ग्रामीणों की राह आसान करने के लिए स्वीकृत इस सड़क के नाम पर 4.97 लाख रुपये पूरे निकाल लिए गए, लेकिन सड़क आज भी अधूरी और बदहाल पड़ी है।
पंचायत भवन निर्माण: सबसे बड़ा खेल पंचायत भवन के नाम पर हुआ है। यहाँ 37.44 लाख रुपये से अधिक की भारी-भरकम राशि डकार ली गई, लेकिन करोड़ों की बात करने वाले इस भ्रष्ट तंत्र ने काम को आज भी अधूरा छोड़ रखा है।
महिला जनप्रतिनिधि के अधिकारों पर 'डाका'
मध्य प्रदेश सरकार जहाँ एक तरफ महिला सशक्तिकरण और पंचायतों में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने का दावा करती है, वहीं बेहटा पंचायत में इसके उलट तस्वीर नजर आ रही है। निर्वाचित महिला सरपंच श्रीमती गायत्री बाई जाटव को विश्वास में लिए बिना, उनकी जानकारी के बगैर सचिव द्वारा इतनी बड़ी राशि का हेरफेर करना सीधे तौर पर एक महिला जनप्रतिनिधि के अधिकारों पर डाका है।
बड़ा सवाल: कब जागेगा कोलारस जनपद प्रशासन?
ग्रामीणों में इस बात को लेकर भारी आक्रोश है कि जब काम पूरा ही नहीं हुआ, तो सरकारी खजाने से लाखों रुपये की राशि कैसे और किसकी शह पर निकाल ली गई? क्या इस पूरे फर्जीवाड़े में केवल सचिव शामिल है या जनपद स्तर के जिम्मेदार अधिकारियों की मिलीभगत से इस भ्रष्टाचार को अंजाम दिया गया है?
अब देखना यह है कि महिला जनप्रतिनिधि को ठेंगा दिखाने वाले और शासकीय धन का बंदरबांट करने वाले ऐसे भ्रष्ट तंत्र पर कोलारस जनपद प्रशासन और जिला प्रशासन कब तक सख्त कार्रवाई करता है, या फिर इस मामले को भी ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा


