सभी परियोजना अधिकारी आंगनबाड़ी केंद्रों का निरीक्षण करें - कलेक्टर, जिला पोषण समिति की बैठक में दिए निर्देश

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कलेक्टर एवं जिला मजिस्ट्रेट  अर्पित वर्मा ने महिला एवं बाल विकास विभाग के सभी परियोजना अधिकारियों को आंगनबाड़ी केंद्रों का सतत निरीक्षण करने के निर्देश दिए हैं। जिला पोषण समिति की बैठक में समीक्षा करते हुए कलेक्टर अर्पित वर्मा ने सभी सीडीपीओ को स्पष्ट कहा है कि आंगनबाड़ी केंद्र प्रतिदिन समय पर खुलना चाहिए और आंगनबाड़ी केंद्र में जो गतिविधियां समय-समय पर होनी है वह संचालित होनी चाहिए। सभी परियोजना अधिकारी आंगनबाड़ी केंद्रों पर निगरानी करें। यदि कहीं आंगनबाड़ी केंद्र बंद पाए जाते हैं तो संबंधित पर कार्यवाही करें।


 इसके अलावा आंगनबाड़ी केंद्रों में मिलने वाले पोषण आहार पर भी निगरानी रखी जाए। यदि किसी समूह द्वारा पोषण आहार वितरण में लापरवाही की जाती है तो संबंधित समूह को हटाने के लिए कार्रवाई करें। बच्चों को गुणवत्ता युक्त खाना मिलना चाहिए। यदि परियोजना अधिकारी द्वारा कार्य में लापरवाही बरती जाएगी तो कार्यवाही होगी इसलिए परियोजना अधिकारी अपने काम के प्रति अलर्ट मोड पर आ जाएं और एक सप्ताह में उनके काम में प्रगति आना चाहिए।

 इसके अलावा बैठक में महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा संचालित विभिन्न कार्यक्रमों की समीक्षा की गई जिसमें हितग्राही पोषण ट्रैक्टर में पंजीकृत गर्भवती महिलाएं जिनके आधार सत्यापन, आभा आईडी की समीक्षा हुई। इसमें गर्भवती महिलाएं, धात्री माताएं, 0 से 3 वर्ष के बच्चे, 3 से 6 वर्ष के बच्चे, शाला पूर्व शिक्षा हेतु पंजीयन, अपार आईडी, समग्र सत्यापन, टी एच आर वितरण, बच्चों को आंगनबाड़ी केदो में नाश्ता एवं गर्म पके भोजन प्रदाय की स्थिति आदि की समीक्षा की गई।

 कलेक्टर  अर्पित वर्मा ने समीक्षा के दौरान कहा है कि जिन भी मानकों में विभाग द्वारा बेहतर काम नहीं किया जा रहा है उसमें सुधार लाएं अन्यथा सीडीपीओ पर कार्यवाही होगी। अपनी-अपनी परियोजना में सीडीपीओ जिम्मेदार अधिकारी हैं। 

एनआरसी में बच्चों को भर्ती कराने के निर्देश

जिले में 100 बिस्तर का एनआरसी है जिसमें अति गंभीर कुपोषित बच्चों को रखा जाता है ताकि बेहतर देखभाल और उपचार के साथ उनकी स्थिति में सुधार लाया जा सके। कलेक्टर  अर्पित वर्मा ने महिला एवं बाल विकास विभाग के जिला कार्यक्रम अधिकारी धीरेंद्र जादौन से बच्चों की जानकारी लेते हुए एन आर सी के बेहतर  प्रबंधन के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री बाल आरोग्य संवर्धन कार्यक्रम के तहत अति गंभीर कुपोषित बच्चों की स्थिति की समीक्षा की गई।

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