चारपाई पर बैठकर परखी मजबूती, कारीगर से किया संवाद
ग्राम सिंहनिवास के दौरे के दौरान कलेक्टर वर्मा ने एक अनोखी पहल दिखाई। रास्ते में चारपाई बुनते कारीगर सिरनाम परिहार को देखकर उन्होंने अपना काफिला रुकवाया और सीधे उनसे बातचीत की। कलेक्टर ने खुद चारपाई पर बैठकर उसकी मजबूती जांची और पारंपरिक कला की सराहना की। उन्होंने इसे स्वरोजगार का बेहतरीन उदाहरण बताते हुए ग्रामीणों, खासकर बच्चों को शिक्षा के प्रति जागरूक रहने की सलाह दी।
पानी की बर्बादी पर सख्त रुख
निरीक्षण के दौरान जब कलेक्टर की नजर व्यर्थ बहते पानी पर पड़ी, तो उन्होंने तुरंत उसे बंद करवाया। उन्होंने ग्रामीणों को स्पष्ट संदेश दिया—“हर बूंद कीमती है।” कलेक्टर ने जल संरक्षण को सामूहिक जिम्मेदारी बताते हुए सभी से पानी बचाने की अपील की।
अफसरों को चेतावनी: लापरवाही नहीं होगी बर्दाश्त
मैदानी दौरे के बाद कलेक्टर ने प्रशासनिक बैठकों में भी सख्ती दिखाई। राजस्व विभाग की समीक्षा बैठक में उन्होंने नामांतरण, बंटवारा और सीमांकन जैसे मामलों में देरी पर नाराजगी जताई और स्पष्ट किया कि अब किसी भी प्रकार की ढिलाई स्वीकार नहीं की जाएगी।
सीएम हेल्पलाइन की समीक्षा करते हुए उन्होंने 500 दिनों से लंबित शिकायतों को प्राथमिकता से निपटाने के निर्देश दिए। साथ ही चेतावनी दी कि लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
जनसुनवाई में अनुपस्थिति पर भी सख्ती
कलेक्टर वर्मा ने जनसुनवाई में अधिकारियों की अनुपस्थिति पर भी कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने निर्देश दिए कि हर मंगलवार सभी विभाग प्रमुख स्वयं उपस्थित रहें। प्रतिनिधि भेजकर औपचारिकता निभाने वाले अधिकारियों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
निष्कर्ष
कलेक्टर अर्पित वर्मा की सक्रियता और सख्त प्रशासनिक शैली से साफ है कि जिले में अब जवाबदेही और कार्य संस्कृति को प्राथमिकता दी जा रही है। उनके इस एक्शन मोड का असर जमीनी स्तर पर साफ दिखाई देने लगा है।


