कल्लू महाराज ने बताया कि दिनारा में स्वास्थ्य विभाग की व्यवस्था होने के बावजूद पोस्टमार्टम हाउस उपलब्ध नहीं है। उन्होंने कहा कि वर्षों पहले स्कूल के पीछे एक शवगृह बनाया गया था, लेकिन वह लगभग 30 वर्षों से बंद पड़ा है और उपयोग में नहीं है। परिणामस्वरूप सड़क दुर्घटना, करंट लगने, सांप के काटने, आत्महत्या अथवा अन्य कारणों से किसी व्यक्ति की मृत्यु होने पर शव का पोस्टमार्टम कराने के लिए करैरा ले जाना पड़ता है। इससे मृतक के परिजनों को कई घंटे तक इंतजार करना पड़ता है और उन्हें मानसिक, आर्थिक एवं सामाजिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।
उन्होंने कहा कि दिनारा क्षेत्र लगभग 70 गांवों का प्रमुख केंद्र है। यदि यहां पोस्टमार्टम हाउस की सुविधा उपलब्ध हो जाए तो आसपास के ग्रामीणों को समय पर आवश्यक प्रक्रिया पूरी कराने में सुविधा मिलेगी तथा अनावश्यक विलंब से भी राहत मिलेगी। उनका कहना है कि शासन को जनहित को ध्यान में रखते हुए इस मांग पर गंभीरता से विचार करना चाहिए।
समाजसेवी कल्लू महाराज ने यह भी सुझाव दिया कि प्रस्तावित पोस्टमार्टम हाउस आधुनिक सुविधाओं से युक्त बनाया जाए। परिसर की सुरक्षा के लिए चारों ओर सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएं, पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, चारदीवारी का निर्माण कराया जाए तथा परिसर में छायादार एवं पर्यावरण अनुकूल पौधारोपण भी किया जाए। उनका कहना है कि इससे परिसर सुरक्षित, स्वच्छ और व्यवस्थित रहेगा तथा आमजन को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी।
उन्होंने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, स्वास्थ्य मंत्री और स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों से अपील की है कि दिनारा क्षेत्र की इस वर्षों पुरानी मांग को प्राथमिकता के आधार पर पूरा किया जाए। उनका कहना है कि स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार केवल अस्पताल भवन तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि पोस्टमार्टम जैसी आवश्यक सुविधाएं भी प्रत्येक बड़े क्षेत्र में उपलब्ध कराई जानी चाहिए।
इस मांग का समर्थन दीपक तिवारी, जितेंद्र लोधी, पंजाब लोधी, अजय लोधी, पुष्पेंद्र लोधी, जयराम लोधी, राजू लोधी एवं मैथिली शरण गुप्ता सहित अनेक स्थानीय नागरिकों ने भी किया है। सभी ने शासन और प्रशासन से जनभावनाओं का सम्मान करते हुए दिनारा में शीघ्र आधुनिक पोस्टमार्टम हाउस के निर्माण तथा वर्षों से बंद पड़े पुराने शवगृह के पुनर्विकास की मांग की है, ताकि क्षेत्र के हजारों लोगों को राहत मिल सके।


