भक्ति में ही शक्ति: गौ सेवक कल्लू महाराज की 9 दिवसीय अग्नि तपस्या पूर्ण, विश्व कल्याण की कामना

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 दिनारा। हनुमान मंदिर दिनारा में गौ सेवक कल्लू महाराज द्वारा नौतपा के दौरान की गई 9 दिवसीय अग्नि तपस्या सोमवार को पूर्ण हुई। तपस्या के समापन अवसर पर सुंदरकांड पाठ, हवन, कन्या भोज एवं श्रीराम धुन का आयोजन किया गया। इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे और धार्मिक कार्यक्रमों में भाग लिया।


गौ सेवक कल्लू महाराज ने बताया कि उन्होंने नौतपा की प्रचंड गर्मी में चारों ओर अग्नि प्रज्वलित कर यह तपस्या विश्व कल्याण, विश्व शांति, जनकल्याण, गौ माता, जीव-जंतुओं, पशु-पक्षियों तथा भारत की सुरक्षा में दिन-रात तत्पर रहने वाली भारतीय सेना के जवानों के स्वास्थ्य एवं मंगल के लिए की थी। उनका संकल्प था कि अच्छी वर्षा हो, धरती हरियाली से आच्छादित हो और गौवंश सहित समस्त प्राणियों को पर्याप्त चारा एवं पानी उपलब्ध हो सके।


कल्लू महाराज ने कहा कि मनुष्य को सदैव अपने कर्म करते रहना चाहिए और फल की चिंता भगवान पर छोड़ देनी चाहिए। उन्होंने कहा कि संसार में सबसे बड़ा सहारा ईश्वर का है और भक्ति के मार्ग पर चलकर ही सच्ची शक्ति प्राप्त की जा सकती है। उनका संदेश था कि सभी लोगों को धर्म, सेवा और परोपकार के कार्यों में बढ़-चढ़कर भाग लेना चाहिए तथा जीव-जंतुओं और गौ माता की रक्षा के लिए आगे आना चाहिए।


उन्होंने कहा कि यह तपस्या किसी एक व्यक्ति या समुदाय के लिए नहीं, बल्कि पूरे विश्व के सुख, शांति और कल्याण के लिए की गई थी। सभी स्वस्थ रहें, सुरक्षित रहें और जीवन में उन्नति करें, यही उनकी कामना है। उन्होंने भारतीय सेना के जवानों के प्रति विशेष सम्मान व्यक्त करते हुए कहा कि उनकी वजह से देश सुरक्षित और शक्तिशाली है तथा सभी नागरिक चैन की नींद सो पाते हैं।


तपस्या पूर्ण होने के बाद अशोक होटल स्थित हनुमान मंदिर परिसर में सुंदरकांड पाठ का आयोजन किया गया। इसके पश्चात हवन संपन्न हुआ तथा कन्या भोज कराया गया। श्रद्धालुओं ने एक घंटे तक सामूहिक रूप से श्रीराम धुन का जाप कर वातावरण को भक्तिमय बना दिया।


कार्यक्रम के अंत में गौ सेवक कल्लू महाराज ने कहा कि “भक्ति में ही शक्ति है और शक्ति में ही भक्ति है। हम सभी मिलकर भगवान श्रीराम का स्मरण करें, गौ सेवा करें, जीव-जंतुओं की रक्षा करें और मानवता की सेवा को अपना धर्म बनाएं। यही सच्चा राष्ट्र धर्म और विश्व कल्याण का मार्ग है।”


इस अनूठी तपस्या और धार्मिक आयोजन की क्षेत्रभर में सराहना की जा रही है तथा श्रद्धालु इसे आस्था, सेवा और जनकल्याण का प्रेरणादायी उदाहरण बता रहे हैं।

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