शिवपुरी में ‘दूध संग्राम’: कलेक्ट्रेट में सुनवाई नहीं हुई तो विक्रेताओं ने मंदिर में ली ‘प्रतिज्ञा’

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 ₹5 की कटौती के खिलाफ आर-पार की जंग; बोले दूधिया— "चाहे धंधा बंद करना पड़े या झांसी-ग्वालियर दूध भेजना पड़े, ₹55 से कम में नहीं देंगे एक बूंद!"


शिवपुरी। जिले के दुग्ध उत्पादकों और दूध विक्रेताओं ने अपनी मेहनत की कीमत पर कैंची चलाए जाने के विरोध में प्रशासन और डेरी संचालकों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। दूध के दामों में अचानक की गई ₹5 प्रति लीटर की भारी कटौती से नाराज जिलेभर के दूधिया और किसान आज प्रसिद्ध  चिंताहरण माता मंदिर परिसर में एकजुट हुए। यहाँ उन्होंने भगवान के साक्ष्य में सामूहिक रूप से संकल्प लिया कि वे किसी भी कीमत पर ₹50 लीटर में दूध की सप्लाई नहीं करेंगे।

दूधिया समाज ने साफ कर दिया है कि अगर उन्हें ₹55 प्रति लीटर का न्यूनतम दाम नहीं मिला, तो वे शिवपुरी शहर की दूध सप्लाई पूरी तरह ठप कर देंगे।


प्रशासन सो रहा है, किसान रो रहा है"

आंदोलनकारियों का गुस्सा इस बात को लेकर ज़्यादा है कि उनकी आवाज़ सुनने वाला कोई नहीं है। कल ही इन लोगों ने जिला कलेक्ट्रेट पहुंचकर अपनी समस्याओं को लेकर एक ज्ञापन सौंपा था, लेकिन चौबीस घंटे बीत जाने के बाद भी उस पर कोई ठोस कार्रवाई या आश्वासन नहीं मिला।

"शासन और प्रशासन को हमारी कोई फिक्र नहीं है। पशु चारे से लेकर हर चीज महंगी हो गई है, लेकिन हमारे दूध के दाम गिराए जा रहे हैं। जब तक हमें पड़ता (मुनाफा) नहीं खाएगा, हम किसी डेरी या हलवाई को दूध नहीं बेचेंगे।"

— व्यथित दुग्ध उत्पादक, शिवपुरी आर-पार के मूड में किसान: चक्काजाम और बाहरी जिलों का रुख करने की चेतावनी

दूध विक्रेताओं ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि यह आंदोलन सिर्फ शिवपुरी शहर तक सीमित नहीं रहेगा। यदि उनकी मांगें तुरंत नहीं मानी गईं, तो रणनीति के तहत निम्नलिखित कदम उठाए जाएंगे:

शहर की नाकेबंदी और चक्काजाम: मांगें पूरी न होने की सूरत में सड़कों पर उतरकर उग्र आंदोलन और चक्काजाम किया जाएगा।

सप्लाई का रुख मोड़ेंगे: शिवपुरी शहर को दूध न देकर, उत्पादक अपना दूध झांसी, ग्वालियर और गुना जैसे पड़ोसी जिलों की डेरियों में भेजेंगे जहाँ उन्हें सही दाम मिल सके।

भविष्य में और बढ़ेंगे दाम: किसानों ने चेतावनी दी है कि आज हमारी मांग ₹55 है, लेकिन जिस तरह से महंगाई बढ़ रही है, आने वाले समय में हम ₹60 से ₹70 प्रति लीटर से कम में दूध नहीं बेचेंगे।

अखबार की टिप्पणी:

दूध विक्रेताओं के इस 'दूध बंद' आंदोलन के ऐलान से शिवपुरी शहर के आम नागरिकों के माथे पर चिंता की लकीरें खींच गई हैं। यदि प्रशासन ने समय रहते हस्तक्षेप कर डेरी संचालकों और दूधिया समाज के बीच का गतिरोध नहीं सुलझाया, तो शहर में दूध के लिए त्राहि-त्राहि मच सकती है।

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