बताया जा रहा है कि कई महिलाओं को स्वयं सहायता समूह अथवा अन्य योजनाओं के नाम पर शिवपुरी बुलाया गया। आरोप है कि उन्हें कार्यक्रम की पूरी जानकारी दिए बिना बसों के माध्यम से लाकर भीड़ का हिस्सा बनाया गया। इसको लेकर स्थानीय स्तर पर तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं।
यदि ये आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह सवाल खड़ा होता है कि क्या ग्रामीण और आदिवासी महिलाओं को केवल भीड़ जुटाने के लिए इस्तेमाल किया गया? सामाजिक और राजनीतिक हलकों में इस मुद्दे पर पारदर्शिता की मांग उठ रही है।
हालांकि, प्रशासन या संबंधित अधिकारियों की ओर से इन आरोपों पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। ऐसे में इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है।
अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि प्रशासन इन आरोपों पर क्या स्पष्टीकरण देता है और कार्यक्रम में शामिल महिलाओं को किन परिस्थितियों में लाया गया था। यदि किसी भी स्तर पर उन्हें गुमराह किया गया है, तो इसकी निष्पक्ष जांच की मांग भी उठ सकती है।


