ग्रामीणों द्वारा दिए गए आवेदन के अनुसार, नल-जल योजना का कार्य वर्ष 2018 में वार्डों में प्रारंभ किया गया था, लेकिन वर्तमान में योजना पूरी तरह ठप पड़ी है। आरोप है कि संबंधित निर्माण कंपनी द्वारा कार्य पूर्ण न होने के बावजूद शासकीय दस्तावेजों में 100 प्रतिशत कार्य पूर्ण दर्शा दिया गया। ग्रामीणों ने कुछ प्रशासनिक अधिकारियों पर मिलीभगत कर दस्तावेजों में लीपापोती करने और अवैध वसूली के भी आरोप लगाए हैं।
आवेदन में कहा गया है कि वर्ष 2018 से अब तक किसी भी वार्ड में नियमित रूप से पानी की आपूर्ति नहीं हो रही है। जहां-जहां पाइपलाइन डालने के लिए आम रास्तों की खुदाई की गई थी, वे स्थान आज भी क्षतिग्रस्त अवस्था में पड़े हैं, जिससे आमजन को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि 10 फरवरी 2026 को जब उन्होंने संबंधित एसडीओ व अन्य अधिकारियों से शिकायत की, तो उनके साथ अभद्र व्यवहार किया गया तथा जान से मारने की धमकी दी गई।
आवेदकगणों ने कलेक्टर से मौके पर पहुंचकर भौतिक निरीक्षण कराने, शासकीय अभिलेखों की जांच करने तथा दोषी अधिकारियों व संबंधित कंपनी के विरुद्ध कठोर कार्रवाई करने की मांग की है।
इस संबंध में प्रशासन की ओर से समाचार लिखे जाने तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया प्राप्त नहीं हो सकी



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