मंदिर के आसपास करीब 1 से 2 किलोमीटर के दायरे में गंदगी के अंबार लगे हुए हैं। जंगल क्षेत्र में हजारों-लाखों की संख्या में पालीथीन फैली पड़ी है। इन पॉलिथीन में बचे खाद्य पदार्थों को खाने के प्रयास में मवेशी और जंगली जानवर इन्हें निगल रहे हैं, जो उनके स्वास्थ्य और जीवन के लिए गंभीर खतरा बन सकता है।
स्थिति यह है कि शहरों में मवेशियों के पॉलिथीन खाने की समस्या अब जंगलों तक पहुंच गई है। बलारपुर के जंगल में भी वही हालात देखने को मिल रहे हैं, जो आमतौर पर शहरी क्षेत्रों में नजर आते हैं।
प्रशासन द्वारा मेले को लेकर पहले ही स्पष्ट निर्देश जारी किए गए थे। कलेक्टर ने वन क्षेत्र में लाउड स्पीकर, ध्वनि विस्तारक यंत्र, पशुबलि और पॉलिथीन के उपयोग पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया था, ताकि वन्यजीवों को किसी प्रकार की परेशानी न हो। इसके बावजूद इन नियमों का खुलेआम उल्लंघन हुआ।
23 से 25 मार्च के बीच जंगल में तेज आवाज में डीजे और गाने बजाए गए, जिससे वन्यजीवों को असुविधा हुई। इतना ही नहीं, इन्हीं भजनों और गानों के दौरान मेले में विवाद की स्थिति भी बनी, जिसमें भंडारा फेंकने जैसी घटनाएं सामने आईं।



