इस अवसर पर गौ सेवक कल्लू महाराज (जितेंद्र लोधी) ने कहा कि महारानी लक्ष्मीबाई भारतीय इतिहास की ऐसी महान वीरांगना थीं जिन्होंने अंग्रेजी शासन के विरुद्ध सन् 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने अपने प्राणों की आहुति देकर मातृभूमि की रक्षा का संदेश दिया। उनका जीवन आज भी देशवासियों के लिए प्रेरणास्रोत बना हुआ है।
कल्लू महाराज ने कहा कि भारत की स्वतंत्रता असंख्य क्रांतिकारियों, वीर सपूतों और महापुरुषों के बलिदान का परिणाम है। महारानी लक्ष्मीबाई, मंगल पांडे, भगत सिंह, चंद्रशेखर आजाद, सुखदेव सहित अनेक स्वतंत्रता सेनानियों ने देश की आजादी के लिए अपने प्राण न्यौछावर कर दिए। उनके त्याग और संघर्ष के कारण ही आज हम स्वतंत्र भारत में सम्मानपूर्वक जीवन जी रहे हैं।
उन्होंने उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि हमें अपने महान क्रांतिकारियों और बलिदानियों को सदैव याद रखना चाहिए। उनके आदर्शों को अपने जीवन में उतारकर राष्ट्र सेवा, समाज सेवा तथा मानवता की सेवा के मार्ग पर आगे बढ़ना चाहिए। उन्होंने कहा कि दूसरों की सहायता करना, पशु-पक्षियों एवं गौमाता की सेवा करना तथा जरूरतमंदों के दुख-दर्द में सहभागी बनना ही सच्चा धर्म है।
कार्यक्रम में वक्ताओं ने प्रसिद्ध पंक्ति "खूब लड़ी मर्दानी, वह तो झांसी वाली रानी थी" का उल्लेख करते हुए महारानी लक्ष्मीबाई के शौर्य और पराक्रम को याद किया। सभी ने संकल्प लिया कि देश की एकता, अखंडता और गौरव की रक्षा के लिए सदैव तत्पर रहेंगे तथा नई पीढ़ी को भी राष्ट्रभक्ति और त्याग की प्रेरणा देते रहेंगे।
कार्यक्रम में दीपक तिवारी, संजू ठाकुर एवं अन्य गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। सभी ने मिलकर वीरांगना महारानी लक्ष्मीबाई को श्रद्धांजलि अर्पित की और उनके बलिदान को नमन करते हुए राष्ट्र निर्माण में योगदान देने का संकल्प लिया।
अंत में उपस्थित जनों ने भारत माता की जय एवं वंदे मातरम् के जयघोष के साथ कार्यक्रम का समापन किया।


